दो महीने में बहाली तय थी तो निलंबन और जांच का नाटक क्यों ?

दो महीने में बहाली तय थी तो निलंबन और जांच का नाटक क्यों ?

रिपोर्टर - उमेश्वर वर्मा 

खैरागढ़. छुईखदान जनपद पंचायत में सहायक ग्रेड-2 लिकेश तिवारी की बहाली ने प्रशासनिक फैसलों की नीयत पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। पंचायत को दरकिनार कर सीधे भुगतान और फर्जीवाड़े के आरोपों में 14 नवम्बर को जिस बाबू को स्थायी समिति ने निलंबित कर सख्त कार्रवाई का संदेश दिया था, उसी बाबू को बुधवार को उसी स्थायी समिति ने बिना विभागीय जांच पूरी हुए बहाल करने का निर्णय ले लिया। सवाल उठ रहा है कि जब दो महीने के भीतर बहाल ही करना था तो निलंबन और विभागीय जांच का दिखावा क्यों किया गया।

वाहवाही से चुप्पी तक, स्थायी समिति के फैसलों पर संदेह

14 नवम्बर की बैठक में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबन की कार्रवाई कर स्थायी समिति ने खूब वाहवाही लूटी थी। तब दावा किया गया था कि 60 दिनों में विभागीय जांच पूरी कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। लेकिन दो महीने बीतते-बीतते न जांच पूरी हुई और न कोई रिपोर्ट सामने आई, इसके बावजूद निलंबन अवधि समाप्त कर तिवारी को बहाल कर दिया गया। अब वही समिति कठघरे में है कि आखिर जांच अधूरी रहते बहाली किस आधार पर की गई।

बार-बार निलंबन, बार-बार बहाली, सवालों में तिवारी का रिकॉर्ड

यह पहला मौका नहीं है जब लिकेश तिवारी निलंबन के बाद बहाल हुए हों। सूत्रों के अनुसार यह उनका दूसरा निलंबन था और हर बार की तरह इस बार भी कुछ समय बाद बहाली हो गई। इसी वजह से पंचायत महकमे में यह चर्चा आम है कि तिवारी को किसी भी कार्रवाई का भय नहीं रहता क्योंकि उन्हें भरोसा है कि कुछ दिन बाद मामला शांत हो जाएगा।

फर्जी भुगतान की जांच अधूरी, सचिवों को बचाने के आरोप

फर्जी भुगतान से जुड़े मामले में जांच अब भी अधूरी बताई जा रही है। आरोप है कि जांच अधिकारी फर्जी भुगतान प्राप्त करने वाले सचिवों को बचाने में लगे हैं। जांच प्रतिवेदन में ग्राम पंचायत भोथली में शौचालय निर्माण कार्य होने की बात तो लिखी गई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि कार्य किस फंड से हुआ। सवाल यह है कि जिस 15वें वित्त की राशि से काम होना था, वह राशि सचिव ने अपने निजी खाते में ले ली थी। जब मामला उजागर हुआ तब राशि पंचायत खाते में जमा की गई, यानी कार्य किसी अन्य फंड से कराया गया, लेकिन इस गंभीर बिंदु को जांच में नजरअंदाज कर दिया गया।

निजी खाते में पैसा लेने वाले सचिव पर कार्रवाई क्यों नहीं

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निजी खाते में पंचायत की राशि लेने वाले सचिव चंदन सिंह ध्रुव पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं, फर्जी भुगतान के पूरे नेटवर्क पर पर्दा डालने का आरोप भी लगाया जा रहा है। पंचायत विभाग से जुड़े कुछ नेताओं का कहना है कि पूरा मामला सेटलमेंट का है। अब लोग खुलकर पूछ रहे हैं कि आखिर यह कैसा सेटमेंट है, जिसमें निलंबन सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया और भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद बहाली आसानी से हो गई।

निलंबन कोई सजा नहीं- देवांगन 

छुईखदान जनपद पंचायत में सहायक ग्रेड-2 लिकेश तिवारी की बहाली को लेकर उठे सवालों पर जनपद सीईओ केश्वरी देवांगन का कहना है कि निलंबन कोई सजा नहीं होता और बहाली का विभागीय जांच से सीधा संबंध नहीं है। सीईओ के अनुसार लिकेश तिवारी के विरुद्ध आरोप पत्र जारी कर दिए गए हैं, विभागीय जांच की प्रक्रिया भी चल रही है और जांच टीम गठित हो चुकी है, जिसकी रिपोर्ट कुछ माह में प्राप्त हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहाली का अर्थ सजा से मुक्ति नहीं है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीईओ ने यह भी कहा कि निलंबन की कोई तय समय-सीमा नहीं होती, कई मामलों में अधिकारी कुछ दिनों में भी बहाल हो जाते हैं, जबकि जांच अपनी प्रक्रिया में चलती रहती है। फिलहाल बहाली का आदेश जारी होना शेष है और आदेश के बाद तिवारी को कार्यभार नहीं दिया जाएगा।