कमीशन का तेल डालो, तभी चलेगा विकास का इंजन
खैरागढ़. जनपद पंचायत खैरागढ़ का सभा कक्ष शनिवार को अचानक “जनभावना एक्सप्रेस” में बदल गया, जहां विकास, वित्त और सुविधा की पटरियों पर चलती पंचायत व्यवस्था अचानक “कमीशन जंक्शन” पर आकर रुक गई। सरपंचों का कहना था कि बिना तेल डाले इंजन आगे नहीं बढ़ता, जबकि इंजन चालक का दावा है कि ट्रेन तो ऑटोमेटिक है—सीधे खाते में चलती है, बीच में कोई स्टेशन ही नहीं आता। सभा में बैठे यात्रियों (सरपंचों) ने टिकट दिखाते हुए कहा कि महीनों से प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं, गाड़ी चल ही नहीं रही।
कुछ सरपंचों ने बताया कि फाइल नाम की चिड़िया तभी उड़ती है जब उसे दाना दिखे, वरना वह महीनों सरकारी पेड़ पर बैठी रहती है। चेक भी मानो “वीआईपी पास” की तरह हो गया है—किसी को तुरंत, किसी को प्रतीक्षा सूची में। हालांकि यह सब बातें सामूहिक रूप से कही गईं, क्योंकि कोई भी यात्री अपना नाम लाउडस्पीकर पर नहीं सुनना चाहता था। आखिर सरकारी यात्रा में गुमनाम रहना ही सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है।
उधर सभा में बैंक, राशन कार्ड और 15वें वित्त की राशि भी चर्चा में आई, पर ये मुद्दे ऐसे लगे जैसे फिल्म में साइड रोल—मुख्य किरदार तो वही पुराना था, “काम रुका क्यों है?”। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि अगर काम बैंक की वजह से रुका है तो बैंक बदलो, अगर प्रक्रिया की वजह से रुका है तो प्रक्रिया बदलो, और अगर किस्मत की वजह से रुका है तो भगवान बदलना थोड़ा मुश्किल है। कुल मिलाकर समाधान की तलाश में बैठक खुद एक समस्या का नमूना बन गई।
दूसरी ओर सीईओ का कहना है कि सब कुछ नियम से चल रहा है—राशि सीधे खाते में आती है, नाम जिला काटता है, और बैंक भी पंचायत का अपना है। यानी सिस्टम इतना पारदर्शी है कि किसी को दिख ही नहीं रहा कि समस्या कहां है। नतीजा यह कि एक तरफ सरपंचों को लगता है कि ब्रेक लगा हुआ है, दूसरी तरफ प्रशासन कहता है कि गाड़ी तो फुल स्पीड में है। अब सच क्या है, यह वही जानता है जो स्टीयरिंग पर भी बैठा है और धक्का भी लगा रहा है।



