शिकायत वापस, लेकिन सवाल बरकरार: विचारपुर धान खरीदी केंद्र मामले में वीडियो आधारित जांच की मांग
खैरागढ़. विचारपुर धान खरीदी केंद्र में कथित अवैध वसूली के मामले में शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत वापस लेने के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि मामला अब केवल शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कथित वीडियो साक्ष्य और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ गया है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रबंधक गंगाराम साहू के खिलाफ यदि किसी प्रकरण में वीडियो, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य सामने आए हों, तो केवल शिकायत वापस हो जाने से जांच समाप्त नहीं हो जानी चाहिए। लोगों का कहना है कि प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक करनी चाहिए।
दामाद ने की थी शिकायत, बाद में हुआ समझौता
जानकारी के अनुसार शिकारीटोला निवासी किसान देविका सिन्हा के परिवार की ओर से उनके दामाद तुलेश सिन्हा ने सहकारिता विभाग एवं जिला प्रशासन को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया था कि धान खरीदी के दौरान गुणवत्ता के नाम पर दबाव बनाकर राशि मांगी गई। शिकायत में एक वीडियो रिकॉर्डिंग का भी उल्लेख किया गया था। मामले ने तूल पकड़ा और विभागीय जांच शुरू हुई। हालांकि लगभग 70 दिनों तक जांच चलने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की बात सामने आई और शिकायत वापस ले ली गई। इसके बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि यदि मामला पूरी तरह निराधार था तो शिकायत क्यों की गई, और यदि शिकायत में दम था तो फिर जांच अपने अंतिम निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंची।
ग्रामीणों का सवाल: वीडियो की जांच होगी या नहीं?
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी शिकायतकर्ता के बयान बदलने या शिकायत वापस लेने से वीडियो जैसे तकनीकी साक्ष्यों का महत्व समाप्त नहीं हो जाता। उनका तर्क है कि यदि वीडियो में कथित रूप से लेन-देन या पैसे की मांग से जुड़ी बातचीत दिखाई देती है, तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि शिकायतकर्ता किसी भी कारण से समझौता कर सकता है, लेकिन यदि कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद है तो उसकी सत्यता की जांच करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियां वास्तविक थीं या नहीं, ताकि भविष्य में किसानों का विश्वास खरीदी व्यवस्था पर बना रहे।
पारदर्शिता के लिए निष्कर्ष जरूरी
ग्रामीणों का मानना है कि यह मामला अब किसी एक व्यक्ति या खरीदी केंद्र का नहीं, बल्कि पूरी धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही का विषय बन गया है। उनका कहना है कि जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोप सही थे, गलत थे या फिर किसी गलतफहमी का परिणाम थे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि मामले को केवल शिकायत वापसी के आधार पर बंद कर दिया गया, तो इससे भविष्य में वास्तविक शिकायतों की गंभीरता भी प्रभावित हो सकती है।



