पहले 75 थोपे गए, अब 59 और थोपने की तैयारी: जेम खरीदी में पंचायतों के नाम पर खेल जारी

पहले 75 थोपे गए, अब 59 और थोपने की तैयारी: जेम खरीदी में पंचायतों के नाम पर खेल जारी

रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा

खैरागढ़. स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर पंचायतों में पारदर्शिता और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच जनपद पंचायत छुईखदान में गार्बेज ट्राइसायकिल खरीदी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व में 75 नग गार्बेज ट्राइसायकिल की खरीदी के बाद अब 25 ग्राम पंचायतों के लिए 59 गार्बेज ट्राइसायकिल की सप्लाई का ऑर्डर चल रहा है। लेकिन आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पंचायतों को सिर्फ नाम की एजेंसी बनाकर रखा गया और जेम पोर्टल के जरिए दलालों ने खेल कर दिया।

पहले 75, अब 59: सवालों के घेरे में लगातार खरीदी

जानकारी के अनुसार पहले चरण में 75 गार्बेज ट्राइसायकिल की सप्लाई की गई थी, जिसकी गुणवत्ता को लेकर उस समय भी सवाल उठे थे। अब एक बार फिर 25 पंचायतों में 59 ट्राइसायकिल की सप्लाई के लिए ऑर्डर जारी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पिछली खरीदी में हुई मनमानी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसका नतीजा यह है कि इस बार भी वही तरीका अपनाया जा रहा है।

22 हजार की ट्राइसायकिल, जेम से 44–50 हजार में खरीदी

स्थानीय बाजार में करीब 22 हजार रुपये में उपलब्ध गार्बेज ट्राइसायकिल को जेम पोर्टल के माध्यम से लगभग 44 हजार से 50 हजार रुपये तक में खरीदा गया। सप्लाई के बाद जब सरपंचों को कीमत की जानकारी लगी तो वे भी हैरान रह गए। यह अंतर केवल कीमत का नहीं, बल्कि पंचायत निधि के संभावित दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

एक ही फर्म से खरीदी, कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हर ग्राम पंचायत एक अलग एजेंसी है, तो लगभग सभी पंचायतों में एक ही फर्म से ट्राइसायकिल की खरीदी कैसे हो गई? जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यह खरीदी सीधे पंचायतों के निर्णय से नहीं, बल्कि दलालों के माध्यम से कराई गई। जेम पोर्टल की प्रक्रिया को दरकिनार कर एक तय फर्म को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है।

जेम आईडी पंचायत की, ओटीपी दलालों के पास

जानकारी के मुताबिक पंचायतों की जेम आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया गया। बताया जा रहा है कि दलाल सचिवों और सरपंचों पर राजनीतिक दबाव बनाकर उनसे ओटीपी हासिल करते हैं और फिर अपने पसंदीदा फर्म से ऑर्डर प्लेस कर देते हैं। इस पूरे तंत्र में कमीशन पहले से तय होने की भी चर्चा है।

सप्लाई के बाद खुलती है असलियत

कई सरपंचों का कहना है कि उन्हें न तो खरीदी की जानकारी थी और न ही कीमत का अंदाजा। जब ट्राइसायकिल पंचायत में पहुंची, तब पता चला कि किस फर्म से और कितने दाम में खरीदी हुई है। यानी पहले सप्लाई, बाद में जानकारी—जो नियमों और पारदर्शिता दोनों के खिलाफ है।

देवरचा पंचायत का अनुभव

देवरचा पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि भुवन नेताम ने बताया कि उनके कार्यकाल में दो गार्बेज ट्राइसायकिल पंचायत में आई हैं, लेकिन इनकी खरीदी पंचायत द्वारा नहीं की गई। ट्राइसायकिल जनपद पंचायत के लोग लाकर छोड़ गए। बिल, भुगतान और खरीदी से जुड़ी कोई जानकारी पंचायत के पास नहीं है। उनका कहना है कि इससे साफ है कि पंचायत को सिर्फ नाम की एजेंसी बनाकर रखा गया।

खुड़मुड़ी पंचायत: अभी तक सप्लाई नहीं

खुड़मुड़ी पंचायत के सरपंच ने बताया कि उनके गांव में अभी तक कोई गार्बेज ट्राइसायकिल सप्लाई नहीं हुई है। खरीदी या ऑर्डर की प्रक्रिया के बारे में भी उन्हें विस्तृत जानकारी नहीं है। यह प्रक्रिया पहले से चली आ रही बताई जा रही है और इसमें सचिव स्तर पर कार्रवाई होने की बात कही गई है।

मैन्हर पंचायत का पक्ष

मैन्हर पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि का कहना है कि उनके यहां भी अभी तक ट्राइसायकिल की सप्लाई नहीं हुई है। खरीदी को लेकर फोन जरूर आया था और पंचायत से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे, लेकिन किस फर्म से और किस माध्यम से खरीदी हो रही है, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

सीईओ का जवाब

इस पूरे मामले पर जनपद पंचायत छुईखदान की सीईओ केश्वरी देवांगन ने कहा कि वे हाल ही में पदभार ग्रहण कर के आई हैं। गार्बेज ट्राइसायकिल की सप्लाई उनके आने से पहले की प्रक्रिया है। फिलहाल उन्हें पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन तथ्यों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी