नप घुमका : जिसे कभी देखा नहीं, वह मुझे पिता बताकर बनवा लिया जाति प्रमाण पत्र’; चुनाव जीतने वाले पार्षद पर गंभीर आरोप

नप घुमका : जिसे कभी देखा नहीं, वह मुझे पिता बताकर बनवा लिया जाति प्रमाण पत्र’; चुनाव जीतने वाले पार्षद पर गंभीर आरोप

00 सिरसाही के जगन्नाथ गंधर्व ने थाने में की शिकायत; संतोष बोले- बचपन से सभी दस्तावेजों में पिता के रूप में उन्हीं का नाम, चुनाव हारने वाला रच रहा साजिश

खैरागढ़. नगर पंचायत घुमका के वार्ड क्रमांक-14 से चुनाव जीतने वाले संतोष गंधर्व की पारिवारिक पहचान और जाति प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम सिरसाही निवासी जगन्नाथ गंधर्व ने ठेलकाडीह पुलिस से शिकायत कर आरोप लगाया है कि संतोष गंधर्व उनका पुत्र नहीं है, इसके बावजूद कथित रूप से उनका नाम पिता के रूप में इस्तेमाल कर स्कूल से दाखिला संबंधी रिकॉर्ड निकलवाया गया और उनकी जाति के आधार पर अनुसूचित जाति वर्ग का लाभ लेकर चुनाव लड़ा गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि वह संतोष को जानते तक नहीं और उन्होंने उसे कभी अपना पुत्र नहीं माना। वहीं संतोष गंधर्व ने आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा है कि बचपन से लेकर आज तक उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, शैक्षणिक रिकॉर्ड सहित सभी दस्तावेजों में जगन्नाथ गंधर्व का ही नाम पिता के रूप में दर्ज है।

घुमका से लोग पूछने आए तब पता चला कि कोई मुझे अपना पिता बता रहा

जगन्नाथ गंधर्व ने बताया कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी तब हुई, जब घुमका से कुछ लोग उनके गांव सिरसाही पहुंचे और उनसे पूछा कि क्या संतोष गंधर्व उनका पुत्र है। इसके बाद उन्हें कथित रूप से पता चला कि सिरसाही के स्कूल से उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज निकाले गए हैं। जगन्नाथ का आरोप है कि उन्हीं दस्तावेजों का उपयोग कर जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया और एससी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा गया। उन्होंने कहा, “मैंने संतोष को कभी देखा तक नहीं, वह मेरा पुत्र नहीं है। बिना मेरी जानकारी और सहमति के मेरा नाम और जाति इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है।” उन्होंने पुलिस से जन्म संबंधी रिकॉर्ड, परिवार रजिस्टर, शैक्षणिक दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र और अन्य अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

संतोष का पलटवार- ‘मेरी मां से की थी शादी, हम पांच भाई-बहन, शुरू से उन्हीं का नाम पिता के रूप में दर्ज’

इधर संतोष गंधर्व ने शिकायतकर्ता के आरोपों को खारिज करते हुए अलग ही पारिवारिक कहानी सामने रखी है। संतोष का कहना है कि जगन्नाथ गंधर्व ने उनकी मां से प्रेम विवाह किया था और बाद में पारिवारिक विवाद के कारण दोनों अलग हो गए। संतोष के अनुसार वे तीन भाई और दो बहन हैं तथा परिवार के दस्तावेजों में शुरू से जगन्नाथ गंधर्व का नाम पिता के रूप में दर्ज है। संतोष ने कहा, “मैंने किसी का नाम फर्जी तरीके से दर्ज नहीं कराया। आधार कार्ड, राशन कार्ड और शैक्षणिक रिकॉर्ड सहित सभी दस्तावेजों में बचपन से उनका ही नाम पिता के रूप में है। इतने वर्षों में कभी कोई आपत्ति नहीं की गई, चुनाव जीतने के बाद अचानक विवाद खड़ा किया जा रहा है।”

स्कूल से दस्तावेज लेने पर भी आमने-सामने दावे, पुलिस को बयान दे चुके हैं संतोष

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि स्कूल से दस्तावेज कथित रूप से गलत जानकारी देकर हासिल किए गए, जबकि संतोष का कहना है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट रूप से बताया था कि वे चुनाव लड़ रहे हैं और अपने पिता का दाखिला संबंधी रिकॉर्ड लेने आए हैं। संतोष के मुताबिक उन्होंने पहचान के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड की प्रति भी स्कूल में दी थी और लिखित रूप से दस्तावेज लेने का कारण बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि ठेलकाडीह पुलिस उन्हें बुलाकर बयान दर्ज कर चुकी है और उन्होंने अपना पक्ष पुलिस के सामने रख दिया है। अब यह जांच का विषय है कि संबंधित शैक्षणिक अभिलेख किस आधार पर जारी किए गए और जाति प्रमाण पत्र बनाते समय किन दस्तावेजों का सत्यापन हुआ।

एक वोट से चुनाव जीतने के बाद उठा विवाद, राजनीतिक साजिश का आरोप

संतोष गंधर्व ने बताया कि वे नगर पंचायत घुमका के वार्ड क्रमांक-14 से निर्दलीय चुनाव लड़े और महज एक वोट से जीत हासिल की। उनका आरोप है कि चुनाव में पराजित पक्ष के लोग इस मामले को हवा दे रहे हैं और पारिवारिक विवाद का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया जा रहा है। संतोष ने कहा कि चुनाव से पहले उनके पिता के नाम या दस्तावेजों को लेकर कभी आपत्ति नहीं उठाई गई, लेकिन जीत के बाद अचानक शिकायत सामने आई है। उन्होंने बताया कि वे बाद में भाजपा से जुड़ चुके हैं। दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दावा किया है कि उसने न्यायिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू की है, जबकि संतोष का कहना है कि उन्हें अभी तक किसी न्यायालयीन प्रकरण की कोई सूचना या नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है।

अब जांच खोलेगी पहचान और दस्तावेजों की पूरी परत

मामले में दोनों पक्षों के दावे पूरी तरह एक-दूसरे के विपरीत हैं। एक ओर जगन्नाथ गंधर्व का कहना है कि संतोष उनका पुत्र नहीं है और उनके नाम तथा जाति का कथित दुरुपयोग हुआ है, वहीं दूसरी ओर संतोष का दावा है कि वे बचपन से ही जगन्नाथ गंधर्व का नाम पिता के रूप में सभी सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में दर्ज कराते आए हैं। ऐसे में अब मूल शैक्षणिक रिकॉर्ड, जन्म संबंधी दस्तावेज, परिवार रजिस्टर, राशन कार्ड, पुराने अभिलेख, जाति प्रमाण पत्र की जांच प्रक्रिया और चुनाव में प्रस्तुत दस्तावेज ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे। शिकायत पर पुलिस जांच के बाद ही यह साफ होगा कि मामला फर्जी दस्तावेज और पहचान के दुरुपयोग का है या फिर वर्षों पुराने पारिवारिक विवाद ने चुनावी जीत के बाद नया राजनीतिक रूप ले लिया है।