शराब सेवन के आरोपों वाला वीडियो वायरल, निलंबित कर्मचारी बोले—पुराना और एडिटेड वीडियो है

शराब सेवन के आरोपों वाला वीडियो वायरल, निलंबित कर्मचारी बोले—पुराना और एडिटेड वीडियो है

00 कलेक्टर परिसर में वायरल वीडियो से बवाल, आबकारी विभाग के मुख्य लिपिक निलंबित

00 वायरल फुटेज पर कर्मचारियों का सवाल—एक व्यक्ति एक दिन में दो अलग वेशभूषा में कैसे?

खैरागढ़. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के कलेक्टर कार्यालय परिसर स्थित जिला आबकारी कार्यालय का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। वीडियो में कार्यालयीन समय के दौरान शराब सेवन किए जाने का दावा किया गया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आबकारी विभाग के मुख्य लिपिक वीरेंद्र सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह कृत्य शासकीय सेवक के आचरण नियमों के विपरीत प्रतीत होता है तथा विभागीय जांच प्रस्तावित है।

कलेक्टर परिसर की घटना से उठे बड़े सवाल

मामले ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ लिया क्योंकि घटना का कथित स्थान स्वयं कलेक्टर कार्यालय परिसर बताया जा रहा है, जहां जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी नियमित रूप से मौजूद रहते हैं। कुछ दिन पहले बीईओ कार्यालय से कर्मचारियों के शराब सेवन का वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई हुई थी, ऐसे में आबकारी विभाग से जुड़ा यह नया मामला सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और कार्य संस्कृति को लेकर नई बहस छेड़ गया है। आम लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि वीडियो सही है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

निलंबित कर्मचारी ने आरोपों को बताया भ्रामक

दूसरी ओर निलंबित मुख्य लिपिक वीरेंद्र सिंह यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वायरल वीडियो पुराना है और उसे भ्रामक तरीके से एडिट कर प्रस्तुत किया गया है। उनका दावा है कि वीडियो में एक ही कर्मचारी अलग-अलग रंग की शर्ट पहने दिखाई दे रहा है, जिससे स्पष्ट है कि विभिन्न दिनों की क्लिपिंग जोड़कर इसे तैयार किया गया है। यादव के अनुसार जिस पेय पदार्थ को शराब बताया जा रहा है, वह स्वास्थ्य खराब होने पर लिया गया ग्लूकोज अथवा अन्य पेय था, जिसका रंग बियर जैसा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण और निष्पक्ष जांच के सीधे निलंबन की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।

गोस्वामी ने भी रखा अपना पक्ष

वीडियो में दिखाई देने वाले कर्मचारी सुजीत पुरी गोस्वामी ने भी पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जाना बताया है। गोस्वामी का कहना है कि संबंधित दिन उनकी तबीयत खराब थी और वे स्वास्थ्य संबंधी पेय ले रहे थे। उन्होंने दावा किया कि कार्यालय में शराब सेवन जैसी कोई घटना नहीं हुई थी और वीडियो को इस प्रकार संपादित किया गया कि देखने वालों को गलत संदेश जाए। गोस्वामी ने कहा कि निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी और कई तथ्यों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि वीडियो को गलत संदर्भ में वायरल किया गया है।

मामले में अब प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। वहीं वीरेंद्र सिंह यादव ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में वीडियो के साथ छेड़छाड़ या भ्रामक संपादन की पुष्टि होती है तो वीडियो तैयार करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। फिलहाल पूरे जिले की निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। अब यह जांच ही तय करेगी कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही हैं या फिर कर्मचारियों का यह दावा सही साबित होता है कि उन्हें एक पुराने और संपादित वीडियो के आधार पर विवाद में घसीटा गया।