ग्राम सेवक बैठे रहे कृषि दुकान में, किसान लुटते रहे काउंटर पर
प्रशासन का नया प्रयोग पहले ही दिन सवालों के घेरे में, किसानों ने कहा- आदेश कागज में, हकीकत मैदान में गायब
खैरागढ़. किसानों को सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी रोकने के लिए कृषि विभाग ने जिस व्यवस्था को बड़े समाधान के रूप में पेश किया था, वह पहले ही दिन दम तोड़ती नजर आई। जिले के विभिन्न निजी कृषि केंद्रों में ग्राम सेवकों और कृषि अमले की तैनाती के बावजूद एक भी किसान को सरकारी दर पर खाद मिलने की पुष्टि नहीं हो सकी। कई किसान सुबह से दुकानों में पहुंचे, लेकिन या तो ग्राम सेवक समय पर नहीं पहुंचे या फिर उनकी मौजूदगी में भी दुकानदार मनमाने तरीके से खाद बेचते रहे।

लादन (अतिरिक्त भार) के बिना खाद नहीं, किसानों को थमाया जा रहा अतिरिक्त बोझ
सोमवार को जिला किसान संघ खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के बैनर तले बड़ी संख्या में किसानों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने आरोप लगाया कि यूरिया और डीएपी की उपलब्धता पहले से ही कम है, ऊपर से खाद के साथ अनावश्यक उत्पादों की जबरन टैगिंग (लादन) की जा रही है। इससे किसानों को जरूरत से ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है और सरकारी दर पर खाद मिलने का दावा केवल कागजों तक सीमित रह गया है.
अम्बे कृषि केंद्र पहुंचे रूसे गांव के किसान पुरानिक ने बताया कि यूरिया लेने पहुंचे तो उन्हें पहले "लादन" लेने की शर्त बताई गई। बाद में पता चला कि मौके पर कृषि विभाग का कर्मचारी भी मौजूद था, लेकिन उसने किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की। किसानों का आरोप है कि यूरिया के साथ बायो पोटाश या अन्य सामग्री अनिवार्य रूप से जोड़कर बेची जा रही है, जिससे खाद की वास्तविक कीमत कई गुना बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि सरकारी दर की बात केवल घोषणा तक सीमित रह गई है।
ड्यूटी से गायब मिले ग्राम सेवक, किसानों ने जनपद अध्यक्ष को लगाया फोन
खैरागढ़ के जंघेल कृषि केंद्र में स्थिति और भी गंभीर बताई गई। बढ़ईटोला के किसानों के अनुसार ड्यूटी पर तैनात ग्राम सेवक रवि कुमार पराते दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच केंद्र से नदारद रहे। इसी दौरान दुकानदार ने किसानों को बताया कि 850 रुपये का लादन लेना अनिवार्य है तथा दो बोरी यूरिया के साथ एक लादन खरीदना पड़ेगा। एक बोरी यूरिया की कीमत 450 रुपये बताई गई। यानी दो बोरी खाद लेने पर किसान को 1750 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। नाराज किसानों ने इसकी शिकायत सीधे जनपद पंचायत अध्यक्ष डॉ. राजेश्री त्रिपाठी से की।
ग्राम सेवकों की बेबसी: फोन किए, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
कई केंद्रों में तैनात ग्राम सेवकों ने किसानों के सामने ही अपने वरिष्ठ अधिकारियों को फोन लगाकर स्थिति से अवगत कराया, लेकिन किसानों का आरोप है कि इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कुछ ग्राम सेवकों ने स्वीकार किया कि वे किसानों को उनका अधिकार नहीं दिला पा रहे हैं। उनका कहना है कि जब दुकानदार खुलेआम कह रहे हैं कि उन्हें ही महंगे दाम पर खाद मिल रही है, तब सरकारी दर पर बिक्री करवाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है।
'छोटे कर्मचारियों को बनाया जा रहा बलि का बकरा'
नाम न छापने की शर्त पर कुछ ग्राम सेवकों ने आरोप लगाया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वास्तविक स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी निचले कर्मचारियों पर डाल दी गई है। उनका कहना है कि किसानों के सामने उन्हें जवाब देना पड़ रहा है, जबकि खाद की ऊंची कीमत और टैगिंग की समस्या उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इससे कर्मचारी भी असहज और दबाव में हैं।
जनपद ने बनाई निगरानी समिति, फिर भी नहीं थम रही किसानों की परेशानी
खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए जनपद पंचायत खैरागढ़ ने एक निगरानी समिति का गठन किया है। समिति में जनपद पंचायत अध्यक्ष डॉ. राजेश्री त्रिपाठी, कृषि सभापति, जनपद सीईओ, कृषि विभाग के अधिकारी लुकमान साहू सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य खाद की उपलब्धता, सरकारी दर पर बिक्री और किसानों की शिकायतों की निगरानी करना है। हालांकि समिति गठन के बाद भी कई कृषि केंद्रों में किसानों को निर्धारित दर पर खाद नहीं मिलने की शिकायतें सामने आने से व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्राम सेवक संघ ने माना- सरकारी दर पर खाद दिलाने में रहे विफल
इस पूरे कार्य के बीच जिला ग्राम सेवक संघ के अध्यक्ष बुलेश कुमार वर्मा ने स्वीकार किया कि पहले दिन किसानों को सरकारी दर पर खाद दिलाने में व्यवस्था सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि दुकानदार बिना लादन के खाद देने से मना कर रहे हैं और ग्राम सेवकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाने की बात कही है।
मजबूरी में किसानों को खाद के साथ लादन देना पड़ रहा है- यादव
कृषि वस्तु विक्रेता संघ के जिला अध्यक्ष भिज्ञेश यादव ने कहा कि वर्तमान में खाद की उपलब्धता पहले से ही सीमित है और जो उर्वरक कंपनियों से मिल रहा है, उसके साथ अतिरिक्त उत्पादों (लादन) की अनिवार्य टैगिंग की जा रही है। ऐसे में विक्रेताओं को भी मजबूरी में किसानों को लादन के साथ खाद देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि लादन के बिना केवल सरकारी दर पर खाद बेची जाए तो दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और बिक्री में कोई लाभ नहीं बचेगा। यादव ने कहा कि यदि प्रशासन किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराना चाहता है तो सबसे पहले कंपनियों द्वारा की जा रही जबरन टैगिंग और लादन व्यवस्था पर रोक लगाने की पहल करनी होगी। तभी किसानों और विक्रेताओं दोनों के हित में समाधान निकल सकेगा।
खाद के साथ लादन या अतिरिक्त सामग्री देने का निर्देश नहीं - संयुक्त संचालक
संयुक्त संचालक कृषि गोपिका गबेल ने कहा कि उर्वरकों के साथ किसानों को किसी प्रकार का लादन या अतिरिक्त सामग्री देना अनिवार्य नहीं है और विभाग की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं किसानों को जबरन लादन के साथ खाद बेचे जाने या निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायत प्राप्त होती है, तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



