नुक्कड़ नाटक और लोक गीतों से वनाग्नि रोकने की मुहिम, 36 गांवों में पहुंचेगी वन विभाग की टीम
खैरागढ़। वनों को भीषण आग (दावानल) से बचाने के लिए वनमंडल खैरागढ़ ने इस बार तकनीक के साथ-साथ लोक संस्कृति को अपना हथियार बनाया है। वनाग्नि के दूरगामी दुष्प्रभावों के प्रति संवेदनशील होते हुए वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में क्षेत्र के 36 गांवों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान छेड़ा गया है। इस अभियान की सबसे खास बात 'झंकार कला मंच' पैलीमेट के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हैं, जो मनोरंजन के साथ ग्रामीणों को सीधे तौर पर यह समझा रहे हैं कि जंगल की आग सिर्फ पेड़ों को ही नहीं, बल्कि जमीन की उर्वरता, जल स्तर और हमारी पूरी खाद्य श्रृंखला को नष्ट कर देती है।

अभियान के तहत छुईखदान परिक्षेत्र के ग्राम कानीमेरा, हाटबंजा और बुढ़ानभाट में आयोजित कार्यक्रमों में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से बताया गया कि आग से औषधीय प्रजातियां और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह खत्म हो जाता है। विभाग ने इस बार फायर कंट्रोल रूम की स्थापना कर मोबाइल नंबर 9301321797 भी जारी किया है, ताकि आग की सूचना तत्काल मिल सके। महुआ पेड़ की ब्लेज़िंग, कंट्रोल बर्निंग और गांवों में मुनादी जैसे पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ अब स्कूली बच्चों के बीच पेंटिंग और निबंध प्रतियोगिताओं के जरिए नई पीढ़ी को भी इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक पुनरुत्पादन के लिए मिट्टी की नमी बचाना अनिवार्य है और इसमें ग्रामीणों का सहयोग ही सबसे बड़ी सफलता होगी।



