मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : लाखों के खर्च में पारदर्शिता गायब, महिला एवं बाल विकास विभाग कठघरे में

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : लाखों के खर्च में पारदर्शिता गायब, महिला एवं बाल विकास विभाग कठघरे में

रिपोर्टर - उमेश्वर वर्मा 

खैरागढ़. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत छुईखदान में प्रस्तावित 115 जोड़ों के सामूहिक विवाह आयोजन को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग और सामाजिक सम्मान प्रदान करना है, लेकिन आयोजन से पहले ही जिस तरह सूचना का अभाव, वित्तीय प्रक्रिया की अस्पष्टता और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनदेखी सामने आई है, उसने पूरे कार्यक्रम को विवादों में ला दिया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह आयोजन सामाजिक सरोकार से जुड़ा होने के कारण अधिक पारदर्शिता और सहभागिता की अपेक्षा करता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो खर्च की प्रक्रिया स्पष्ट की गई। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि लाखों रुपये के शासकीय व्यय में जवाबदेही तय नहीं की जा रही।

तिथि पर जनप्रतिनिधियों की आपत्ति, मुख्यमंत्री की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम पहले क्यों?

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 10 फरवरी को सामूहिक विवाह कार्यक्रम प्रस्तावित है, जबकि इसके चार दिन बाद 14 फरवरी को मुख्यमंत्री का जिला मुख्यालय आगमन तय बताया जा रहा है। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं जिले में आने वाले हैं, तो सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक और भावनात्मक महत्व के कार्यक्रम को चार दिन बाद आयोजित किया जाना चाहिए था। उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ती और नवविवाहित जोड़ों का मनोबल व आत्मसम्मान भी मजबूत होता। जनप्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि तिथि निर्धारण से पहले स्थानीय स्तर पर कोई परामर्श या समन्वय नहीं किया गया, जिससे यह धारणा बनी कि महत्वपूर्ण सामाजिक आयोजन को जल्दबाजी में निपटाया जा रहा है।

9.20 लाख के आयोजन व्यय पर सवाल, टेंडर की कोई जानकारी नहीं

जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सामूहिक विवाह आयोजन में टेंट, पंडाल, सजावट, भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं पर प्रति जोड़ा 8,000 रुपये की दर से कुल 9.20 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। नियमों के अनुसार, इस तरह के बड़े शासकीय व्यय में टेंडर या निर्धारित क्रय प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन जिला और जनपद स्तर के किसी भी निर्वाचित सदस्य को टेंडर से संबंधित कोई सूचना नहीं दी गई। उनका कहना है कि जब यह भी स्पष्ट नहीं है कि काम किस एजेंसी को दिया गया है और किस दर पर, तो यह खर्च अंधेरे में किया जा रहा व्यय प्रतीत होता है।

8.05 लाख की सामग्री खरीदी, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय

योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 7,000 रुपये तक की सामग्री सहायता दी जानी है। 115 जोड़ों के हिसाब से यह राशि 8.05 लाख रुपये बैठती है। नियमों के अनुसार ऐसी खरीदी जेम पोर्टल या वैधानिक माध्यम से होनी चाहिए, लेकिन आरोप है कि किसी भी जनप्रतिनिधि को न तो खरीदी की प्रक्रिया बताई गई और न ही आपूर्तिकर्ता या दरों की जानकारी दी गई। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी बड़ी सामग्री खरीदी यदि बिना सार्वजनिक जानकारी के की जा रही है, तो इसमें मनमानी और पक्षपात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

35,000 रुपये प्रति जोड़ा नकद सहायता, निगरानी व्यवस्था पर प्रश्न

योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को 35,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता दी जानी है। यह योजना का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जा रहा है। 

जनप्रतिनिधियों के बयान : “हमें कोई जानकारी नहीं दी गई”

जिला पंचायत महिला एवं बाल विकास विभाग के सभापति प्रतिनिधि जीवन देवांगन ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली। उन्होंने बताया कि न तो कोई बैठक हुई और न ही टेंडर या खर्च से जुड़ी जानकारी साझा की गई।

छुईखदान जनपद पंचायत में महिला एवं बाल विकास विभाग की सभापति ज्योति जंघेल ने कहा कि उन्हें भी आयोजन या टेंडर प्रक्रिया की कोई पूर्व जानकारी नहीं है और वे संबंधित अधिकारियों से पूछताछ के बाद ही कुछ कह पाएंगी।

वहीं खैरागढ़ जनपद पंचायत के सभापति प्रतिनिधि पूर्णचंद गुप्ता ने बताया कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी शनिवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मिली और टेंडर या खरीदी को लेकर कोई सूचना नहीं दी गई।

अधिकारी का पक्ष : तिथि राज्य शासन से तय, खरीदी नियमों के तहत

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी प्रीत राम खुटेल ने बातचीत में स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 10 फरवरी की तिथि का निर्धारण राज्य शासन स्तर से किया गया है और प्रदेश के सभी जिलों में इसी दिन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह तिथि स्थानीय स्तर पर तय नहीं की गई है। उनके अनुसार 14 फरवरी को मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बाद में फाइनल हुआ, उस समय तक 10 फरवरी की तिथि राज्य शासन के निर्देशानुसार तय हो चुकी थी और स्थानीय स्तर पर तिथि बदलने को लेकर कोई समन्वय नहीं हुआ। सामग्री सहायता के संबंध में उन्होंने बताया कि सामग्री की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है, जबकि सामूहिक विवाह आयोजन पर होने वाले खर्च के लिए निर्धारित क्रय पद्धति और भंडार क्रय नियमों का पालन किया गया है।