धान खरीदी में एक केंद्र पर कार्रवाई, बाकी पर मेहरबानी, अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्टर - उमेश्वर वर्मा
खैरागढ़. विकासखंड छुईखदान के धान खरीदी केंद्र ठाकुरटोला में अनियमितता पाए जाने के बाद उपार्जन प्रभारी के निलंबन को लेकर प्रशासन जहां सख्ती का दावा कर रहा है, वहीं यह कार्रवाई अब निष्पक्षता पर सवाल बनकर सामने आ रही है। किसानों और जानकारों का सीधा सवाल है—जब वजन की गड़बड़ी लगभग हर केंद्र पर बताई जा रही है, तो कार्रवाई सिर्फ एक ही केंद्र पर क्यों?
आकस्मिक निरीक्षण और त्वरित निलंबन
14 जनवरी 2026 को जिला प्रशासन की टीम ने ठाकुरटोला धान खरीदी केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुछ बोरों में मानक से अधिक और कुछ में कम वजन पाए जाने का दावा किया गया। इसी आधार पर उपार्जन प्रभारी गौतरीहा साहू को तत्काल निलंबित कर दिया गया। प्रशासन ने इसे नियम उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई बताया, लेकिन घटनाक्रम पर उठ रहे सवाल तस्वीर का दूसरा पहलू दिखाते हैं।
जानकारी अनुसार निरीक्षण शाम करीब 6 बजे किया गया, जब अधिकांश किसान धान बेचकर लौट चुके थे। उस वक्त तौल उस धान की हुई, जिसे हमाल लॉट में इकट्ठा कर रहे थे। किसान नेताओं का कहना है कि यदि अधिकारी वास्तव में निष्पक्ष जांच चाहते, तो सभी केंद्रों के लॉट से धान निकालकर मानक के अनुसार स्वतंत्र तौल कराते। ऐसा करने पर लगभग हर सोसायटी में वजन तय मानक से अधिक निकलने की संभावना है।
हर सोसायटी में शिकायतें, पर कार्रवाई सीमित
किसान संघ के संयोजक साधु राम का कहना है कि अतरिया, जालबांधा, सलोनी सहित कई सोसायटियों से अधिक वजन तौलने की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ स्थानों पर वीडियो भी बनाए गए हैं, हालांकि डिजिटल तराजू की लाइट कैमरे में कैप्चर न होने के कारण औपचारिक शिकायत नहीं हो सकी। किसान संघ अब अन्य तरीकों से सबूत जुटाने की बात कह रहा है।
उगाही और दबाव के आरोप
किसान संघ का आरोप है कि कई केंद्रों पर खुलेआम पैसे की उगाही हो रही है। पैसे नहीं देने पर एक से दो बारदाना अतिरिक्त धान मांगे जाने की बातें सामने आई हैं। गातापार और गाड़घाट जैसे क्षेत्रों से ऐसे मामलों के संकेत मिल चुके हैं। किसानों का कहना है कि ठोस कार्रवाई न होने से वे शिकायत करने से कतराने लगे हैं, क्योंकि अक्सर कार्रवाई के बजाय प्रबंधकों से दुश्मनी ही मोल लेनी पड़ती है।
‘फंड से बारदाना निकलवाओ, सच सामने आ जाएगा’
एक किसान किशन का कहना है कि यदि वास्तव में पारदर्शिता चाहिए, तो लॉट में रखे धान की स्वतंत्र तौल कराई जाए। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि गड़बड़ी किसी एक केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली है। इससे पहले डोकरभाठा सोसायटी में बिना तौल धान खाली कराने का मामला भी सामने आया था, जिस पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
निलंबित प्रबंधक का पक्ष
निलंबित उपार्जन प्रभारी गौतरीहा साहू का कहना है कि उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि कार्रवाई क्यों की गई। उनका कहना है कि अधिकारियों ने बारदाने का वजन तौला, जिसमें अधिक वजन निकला, लेकिन उन्होंने कभी तौल कर्मियों को किसानों से अतिरिक्त धान लेने का निर्देश नहीं दिया।



