यूजीसी के नए नियमों पर संवर्ण समाज का आक्षेप, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
खैरागढ़. उच्च शिक्षण संस्थाओं में जातिगत समानता को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी 2026 से लागू किए गए नए नियमों को लेकर खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिले में असंतोष सामने आया है। संवर्ण समाज एवं राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ (पंजीयन क्रमांक 1282) ने इन नियमों पर आंशिक संशोधन की मांग करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम जिलाधीश के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया है।
ज्ञापन में संगठन का कहना है कि नए नियमों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य को स्वीकार करते हुए भी यह आशंका जताई गई है कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों व प्राध्यापकों के विरुद्ध झूठे आरोपों के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। आरोपों की पुष्टि अथवा शिकायत के दायरे में आए व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर न दिए जाने को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया गया है।
संगठन ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में नियम सामान्य संवर्ग के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करते, जिससे उच्च शिक्षण संस्थानों में असंतुलन और अनावश्यक विवाद की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में समानता के अधिकार के अंतर्गत सभी वर्गों—विशेषकर सामान्य वर्ग—के विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी समान अवसर और न्याय सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
इसी आधार पर राजपूत क्षत्रिय महासभा व संवर्ण समाज ने यूजीसी के 13 जनवरी 2026 के नियमों को वर्तमान स्वरूप में अस्वीकार करते हुए आंशिक संशोधन की मांग की है। ज्ञापन में यह अपेक्षा व्यक्त की गई है कि नियमों में ऐसी व्यवस्था हो, जिससे निष्पक्ष जांच, पक्ष रखने का अवसर और गलत आरोप सिद्ध होने पर संबंधित के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके, ताकि उच्च शिक्षा में न्यायसंगत और संतुलित वातावरण बना रहे।



