संलग्न शिक्षकों पर अब डीपीआई का सख्त डंडा! आदेश नहीं माना तो रुकेगा वेतन, लगेगा ‘ब्रेक इन सर्विस

संलग्न शिक्षकों पर अब डीपीआई का सख्त डंडा! आदेश नहीं माना तो रुकेगा वेतन, लगेगा ‘ब्रेक इन सर्विस

पहले मांगी थी सूची, अब जारी हुआ कड़ा फरमान; केसीजी में वर्षों से कार्यालयों में जमे शिक्षकों पर बढ़ा दबाव

खैरागढ़. जिला शिक्षा कार्यालय में वर्षों से संलग्न (अटैच) शिक्षकों और व्याख्याताओं को लेकर उठे सवालों के बीच अब लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सख्त रुख अपना लिया है। पहले संलग्न कर्मचारियों की जानकारी तलब करने के बाद अब संचालनालय ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि सभी गैर-शैक्षणिक संलग्न कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थ संस्था में कार्यभार ग्रहण कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराएं। आदेश का पालन नहीं करने वालों का जुलाई 2026 का वेतन रोका जाएगा, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और निर्धारित समय-सीमा के बाद कार्यभार ग्रहण करने पर 'ब्रेक इन सर्विस' का प्रस्ताव भी संचालनालय को भेजा जाएगा। ऐसे में केसीजी जिले में लंबे समय से जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ बताए जा रहे कर्मचारियों पर भी अब कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

पहले सूची मांगी, अब कार्रवाई के निर्देश

गौरतलब है कि डीपीआई ने 19 मई 2026 को विधानसभा शून्यकाल के संदर्भ में सभी जिलों से उन कर्मचारियों की सूची मांगी थी, जो संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद भी जिला, ब्लॉक अथवा अन्य कार्यालयों में कार्यरत हैं। इसके बाद 14 जुलाई को जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया कि संलग्नीकरण समाप्त होने के बावजूद मूल संस्था में उपस्थित नहीं होना और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है। वहीं 15 जुलाई के पत्र में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि समय-सीमा के बाद कार्यभार ग्रहण करने वालों के विरुद्ध सेवा हरण (Break in Service) का प्रस्ताव संचालनालय को भेजना सुनिश्चित करें।

कई व्याख्याताओं भी है संलग्न 

इस आदेश के बाद केसीजी जिले में भी चर्चा तेज हो गई है। पहले प्रकाशित खबर में जिला शिक्षा कार्यालय में वर्षों से कार्यरत कुछ शिक्षकों और व्याख्याताओं के नाम सामने आए थे, जिनके मूल विद्यालयों से लंबे समय से दूर रहने की बात कही गई थी। अब नया सवाल यह है कि क्या डीपीआई के सख्त आदेश के बाद ऐसे सभी कर्मचारी अपने मूल विद्यालयों में लौटेंगे या फिर जिले में पहले की तरह संलग्नीकरण की व्यवस्था जारी रहेगी? शिक्षा जगत और अभिभावकों की निगाहें अब जिला शिक्षा अधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन होता है तो वर्षों से खाली पड़े विद्यालयों को अपने विषय विशेषज्ञ शिक्षक वापस मिल सकते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है