घोर अकाल की आहट: खेतों में दरारें, सूख रही धान की फसल; कर्ज में डूबा किसान अब आसमान ताकने को मजबूर

घोर अकाल की आहट: खेतों में दरारें, सूख रही धान की फसल; कर्ज में डूबा किसान अब आसमान ताकने को मजबूर

29 अगस्त तक जिले में 2,349.2 मिमी बारिश, 10 साल की औसत 2,492.4 मिमी से कम; खैरागढ़ में औसत की महज 83.5% बारिश, निराई-गुड़ाई और खाद डालना तक रोका

आंकड़ों ने खोली बारिश की कमी की तस्वीर

खैरागढ़. सावन-भादो में जिस बारिश का किसान बेसब्री से इंतजार करता है, वही इस बार क्षेत्र से रूठी नजर आ रही है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में बारिश की कमी का असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है। भू-अभिलेख शाखा की 29 अगस्त 2026 की तहसीलवार दैनिक वर्षा रिपोर्ट के अनुसार 1 जून से 29 अगस्त तक जिले में कुल 2,349.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इसी अवधि की विगत 10 वर्षों की औसत बारिश 2,492.4 मिमी रही है। औसत से कम बारिश के कारण धान की फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है और कई इलाकों में खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं।

खैरागढ़ में औसत की महज 83.5% बारिश, छुईखदान भी पीछे

तहसीलवार आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। खैरागढ़ में 554.2 मिमी बारिश हुई, जबकि 10 वर्षों की औसत 663.7 मिमी है, यानी औसत की महज 83.5 प्रतिशत बारिश हुई। छुईखदान में 513.5 मिमी के मुकाबले औसत 591.4 मिमी और बारिश का प्रतिशत 86.8 रहा। गंडई में 555.5 मिमी के मुकाबले औसत 590 मिमी यानी 94.2 प्रतिशत बारिश हुई। वहीं साल्हेवारा में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां 726 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो 647.3 मिमी की औसत बारिश का 112.2 प्रतिशत है। आंकड़े बताते हैं कि जिले में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा और कई क्षेत्रों में कमी का सीधा असर खेती पर पड़ा है।

खेतों में दरारें, चप्पल पहनकर हो रही निंदाई

बारिश की कमी ने खेती की तस्वीर बदल दी है। नवागांव के आसपास कई किसानों ने निराई-गुड़ाई का काम रोक दिया है, जबकि बढ़ईटोला क्षेत्र में भी किसान पानी का इंतजार करते-करते खेत में काम बंद करने की स्थिति में पहुंच गए हैं। धान की बढ़वार कम हो गई है और कई खेतों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। हालात इतने बदले हैं कि जिस धान की निंदाई आमतौर पर बारिश के दिनों में किसान चप्पल उतारकर किया करते थे, उसी खेत में अब सूखी जमीन के बीच चप्पल पहनकर निंदाई करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि पानी ही नहीं है तो खाद डालने और मजदूरी पर पैसा खर्च करना भी जोखिम भरा हो गया है।

बेलगांव से जालबांधा तक किसान परेशान, नदी-नाले और डैम में भी पानी कम

वनांचल क्षेत्र के बेलगांव से लेकर जालबांधा, बढ़ईटोला, बलदेवपुर, पेंड्री और दपका सहित कई इलाकों में बारिश की कमी का असर बताया जा रहा है। नदी-नाले और डैम में पर्याप्त पानी नहीं होने से सिंचाई की उम्मीद भी कमजोर हो गई है। बेलगांव निवासी पुनऊ राम बताते हैं कि बारिश नहीं होने से नदी-नाला सूख गया है और अब तक फसल की पैदावार में करीब 50 फीसदी नुकसान हो चुका है। उनके अनुसार यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो नुकसान 70-80 फीसदी से बढ़कर शत-प्रतिशत तक पहुंच सकता है। घोटिया निवासी हितेश साहू के मुताबिक मुरुम वाली जमीन पर बारिश की कमी का ज्यादा असर पड़ा है और पैदावार करीब 60 फीसदी घट चुकी है।

नहर नहीं, बारिश नहीं; बिजली कटौती ने बोर वाले किसानों को भी घेरा

बढ़ईटोला निवासी उमेश्वर वर्मा का कहना है कि क्षेत्र में न तो पर्याप्त पानी है और न ही नहर की सुविधा। बारिश की उम्मीद में किसान अभी भी चप्पल पहनकर खेत में निंदाई कर रहे हैं, लेकिन कुछ दिन और यही स्थिति रही तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। कई किसानों ने खेत में काम तक छोड़ दिया है। दूसरी ओर पेंड्रीकला निवासी युवराज साहू ने बताया कि बारिश नहीं होने से वाटर लेवल नीचे चला गया है और बिजली कटौती ने परेशानी और बढ़ा दी है। बोर वाले खेत में भी करीब एक एकड़ धान को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। यानी जिन किसानों के पास सिंचाई साधन हैं, वे भी बिजली और पानी की दोहरी मार से पूरी फसल नहीं बचा पा रहे हैं।

खाद डालना भी रोक दिया, पानी नहीं तो मेहनत भी बेकार

जिले किसानों का कहना है कि लगातार बारिश नहीं होने के कारण धान की फसल में खाद डालने और निराई-गुड़ाई पर खर्च करना भी जोखिम भरा लग रहा है। कई किसानों ने काम रोक दिया है और अब उनकी नजर आसमान पर टिकी है। वनांचल क्षेत्र के बेलगांव से लेकर जालबांधा, बढ़ईटोला, बलदेवपुर, पेंड्री और दपका सहित पूरे क्षेत्र में कम बारिश का असर दिखाई दे रहा है। नदी-नाले और डैम भी पर्याप्त पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। जिन किसानों के पास ट्यूबवेल या अन्य सिंचाई साधन हैं, उनके खेतों में फसल अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दे रही है, लेकिन वहां भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना चुनौती बन गया है।

लाखों का कर्ज लेकर बोई फसल, अब माथा पकड़कर आसमान देख रहा किसान

किसानों ने खेती के लिए खाद, बीज, मजदूरी और अन्य जरूरतों में बड़ी रकम खर्च की है। कई किसान कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन अब फसल की हालत देखकर उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। खेतों में पानी नहीं होने से धान की बढ़वार प्रभावित है और पैदावार को लेकर भी किसान आशंकित हैं। किसान के लिए सबसे दर्दनाक स्थिति यह है कि कर्ज चुकाने की उम्मीद जिस फसल से थी, वही फसल अब पानी के अभाव में संकट में है। खेत में खड़ी कमजोर फसल को देखकर किसान के चेहरे की चिंता साफ दिखाई दे रही है।

लाखों का कर्ज लेकर खेती, अब कर्जमाफी की चर्चा; आंखों में मायूसी

किसानों ने खाद, बीज, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च के लिए बड़ी रकम लगाई है, कई किसान कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं। अब जब फसल ही पानी के अभाव में कमजोर पड़ रही है तो कर्ज चुकाने की चिंता भी सामने खड़ी हो गई है। किसानों के बीच एक बार फिर चर्चा है कि यदि इस बार फसल खराब हुई तो कर्जमाफी का सहारा मिलेगा या नहीं? बारिश नहीं होने से सिर्फ धान की फसल ही नहीं, किसानों की उम्मीद भी सूखती नजर आ रही है। खेतों में पड़ी दरारें, कमजोर होती धान की बालियां और आसमान की ओर टकटकी लगाए किसान—पूरे क्षेत्र में घोर अकाल जैसी चिंता की तस्वीर सामने ला रहे हैं।

जिले में बारिश की स्थिति पर्याप्त है। विगत 10 वर्षों की औसत वर्षा के मुकाबले अब तक करीब 97 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग की आगामी सप्ताह की रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

राजकुमार सोलंकी, उप संचालक कृषि  जिला केसीजी