तीन लाख में खरीदा टैंकर, बाजार में कीमत दो लाख के आसपास!
पंचायतों में सप्लाई के बाद टैंकर की दर पर उठे सवाल; ऑनलाइन बाजार में 1.80 से 2 लाख तक कीमत, अंतर की जांच की मांग
खैरागढ़. विधायक निधि से पंचायतों में सप्लाई किए गए पानी टैंकरों की खरीदी प्रक्रिया के बाद अब टैंकर की कीमत को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पंचायतों के लिए प्रति टैंकर 3 लाख रुपए की स्वीकृति और खरीदी के बीच ऑनलाइन बाजार में उपलब्ध समान क्षमता के टैंकरों की कीमत इससे काफी कम दिखाई दे रही है। इंडिया मार्ट सहित अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर उपलब्ध विक्रेताओं की जानकारी में 5000 लीटर क्षमता वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली टैंकर की कीमत करीब 1.80 लाख से 2 लाख रुपए के आसपास दिखाई दे रही है। ऐसे में 3 लाख रुपए की दर पर खरीदे गए टैंकर की वास्तविक बाजार कीमत, स्पेसिफिकेशन और भुगतान की दर का मिलान अब जांच का अहम बिंदु बन गया है।

ऑनलाइन बाजार में 2 लाख, पंचायत में 3 लाख की खरीदी
उपलब्ध ऑनलाइन बाजार जानकारी के अनुसार 5000 लीटर क्षमता वाले पानी टैंकर और चार-पहिया/ट्रेलर आधारित टैंकरों की कीमत अलग-अलग मॉडल और निर्माण गुणवत्ता के आधार पर करीब 1.80 लाख से 2 लाख रुपए के बीच दिखाई दे रही है। वहीं पंचायतों के लिए स्वीकृत राशि 3 लाख रुपए प्रति टैंकर है। ऐसे में केवल ऑनलाइन दिखाई जा रही कीमत को अंतिम बाजार दर नहीं माना जा सकता, लेकिन यदि समान क्षमता, समान मॉडल, ट्रॉली, एक्सल, मटेरियल और अन्य स्पेसिफिकेशन वाले टैंकर की बाजार कीमत करीब 2 लाख रुपए है, तो 3 लाख रुपए की खरीदी में करीब एक लाख रुपए तक के अंतर की वजह स्पष्ट होना जरूरी है।
सिर्फ टैंकर नहीं, स्पेसिफिकेशन का भी होगा मिलान
जानकारों के अनुसार टैंकर की कीमत उसकी क्षमता के साथ-साथ MS शीट की मोटाई, टैंकर का वजन, चेसिस, एक्सल, ट्रॉली की गुणवत्ता, टायर, पंप, फिटिंग और अन्य उपकरणों पर निर्भर करती है। इसलिए बाजार में उपलब्ध कीमत और पंचायत द्वारा खरीदे गए टैंकर की दर की सही तुलना के लिए दोनों के स्पेसिफिकेशन समान होना जरूरी है। यदि पंचायतों को सप्लाई किए गए टैंकर में अतिरिक्त उपकरण या बेहतर गुणवत्ता शामिल थी, तो उसकी कीमत बढ़ सकती है। लेकिन इसके लिए खरीद फाइल में तकनीकी विवरण और दर का आधार दर्ज होना चाहिए।
पंचायतों को दर की जानकारी थी या सिर्फ स्वीकृत राशि पर खरीदी?
मामले में यह भी जांच का विषय है कि टैंकर खरीदते समय पंचायतों ने बाजार दर का तुलनात्मक अध्ययन किया था या नहीं। क्या अलग-अलग विक्रेताओं से कोटेशन/दर प्राप्त की गई थी, क्या जेम पर बिड में प्रतिस्पर्धी विक्रेता शामिल हुए और जिस दर पर टैंकर खरीदा गया, उसका तकनीकी एवं वित्तीय औचित्य फाइल में दर्ज है या नहीं—इन दस्तावेजों से ही स्थिति स्पष्ट होगी। खासकर तब, जब ऑनलाइन बाजार में समान क्षमता के टैंकर कम कीमत पर उपलब्ध होने की जानकारी सामने आ रही है।
19 पंचायतों का टेंडर एक ही फर्म को, प्रतिस्पर्धा हुई या सेटिंग?
विधायक निधि से 19 पंचायतों के लिए स्वीकृत 57 लाख रुपए के टैंकरों की बाद की GeM प्रक्रिया में एक ही फर्म मां बिंदेश्वरी लेथ एंड इंजीनियरिंग वर्क्स शॉप का नाम सामने आने से खरीद में वास्तविक प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल गहरा गए हैं। यदि प्रत्येक पंचायत के लिए अलग-अलग जेम बिड प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो अन्य विक्रेताओं ने भी भाग लिया होगा और अलग-अलग दरों पर प्रतिस्पर्धा की संभावना रहती है। ऐसे में सभी पंचायतों का काम एक ही फर्म को मिलना महज संयोग था या पूरी प्रक्रिया में पहले से तय व्यवस्था के तहत चयन हुआ, यह जांच का अहम बिंदु है। शिकायतकर्ता ने इसी कारण जेम की पूरी बिड हिस्ट्री, शामिल विक्रेताओं, बिड की तारीख, चयन का आधार, आईपी एड्रेस और लॉगिन रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। खास बात यह भी है कि इसी फर्म का नाम 2023-24 में टैंकर सप्लाई और भुगतान के दौरान सामने आया था। ऐसे में बाद की जेम प्रक्रिया में भी उसी फर्म के चयन से प्रतिस्पर्धी खरीद हुई या प्रक्रिया को किसी स्तर पर प्रभावित किया गया, यह स्पष्ट करने के लिए पूरे 19 पंचायतों के GeM रिकॉर्ड की जांच जरूरी हो गई है।
19 टैंकरों में अंतर बड़ी रकम बन सकता है
प्रति टैंकर 3 लाख रुपए की दर से 19 टैंकरों के लिए 57 लाख रुपए की स्वीकृति हुई थी। यदि खरीदे गए टैंकर का वास्तविक बाजार मूल्य 1.80 से 2 लाख रुपए के आसपास ही निकलता है, तो स्वीकृत दर और बाजार दर के बीच का अंतर कुल राशि में बड़ा हो सकता है। हालांकि वास्तविक वित्तीय अंतर निकालने के लिए सप्लाई किए गए टैंकर के मॉडल और पूरे स्पेसिफिकेशन की स्वतंत्र बाजार तुलना जरूरी होगी। यही वजह है कि अब मामले में केवल खरीद प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि टैंकर की वास्तविक कीमत और भुगतान की दर भी जांच का विषय बन गई है।




