छुईखदान जनपद: बजट प्रावधान नहीं, फिर भी 5 लाख के बिल पास; चार सदस्यों ने दर्ज किया विरोध
जनपद पंचायत छुईखदान की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में वृक्षारोपण कार्य के बिलों को लेकर जमकर हंगामा।
बिना बजट प्रावधान, बिना प्राक्कलन, बिना तकनीकी मार्गदर्शन और बिना क्रय समिति की स्वीकृति के बिल कर दिया पास
चार सदस्यों ने विरोध दर्ज कराते हुए कलेक्टर और प्रमुख सचिव से जांच की मांग की है।
खैरागढ़. जनपद पंचायत छुईखदान में वृक्षारोपण कार्य और सामग्री खरीदी के भुगतान को लेकर बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सामान्य प्रशासन समिति की 23 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में वृक्षारोपण कार्य से जुड़े बिल क्रमांक 51, 54 और 55 प्रस्तुत किए गए। बैठक में सदस्य सुधीर गोलछा ने बिलों में जीएसटी नंबर का उल्लेख नहीं होने पर आपत्ति जताई और सवाल किया कि क्या संबंधित कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल है।
इस पर शाखा प्रभारी लिकेश तिवारी ने बताया कि उक्त कार्य के लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में कोई प्रावधान नहीं है, हालांकि पिछली बैठक में सदन की अनुमति लेकर कार्य कराया गया था। बैठक में यह भी सामने आया कि कार्य के लिए न तो प्राक्कलन तैयार किया गया, न तकनीकी मार्गदर्शन लिया गया और न ही क्रय समिति से अनुमोदन कराया गया। निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाने और GeM पोर्टल से खरीदी नहीं करने का मुद्दा भी उठा।
चार सदस्यों ने दर्ज किया विरोध, पांच के बहुमत से बिल पास
बैठक में भुगतान के मुद्दे पर पांच सदस्यों के पक्ष में मतदान और चार सदस्यों के विरोध का उल्लेख है। असहमति जताने वाले सदस्यों में डोमार सिंह भेड़िया, राजिम मुकेश चंदेल, सुधीर गोलछा और ज्योति जंघेल शामिल हैं।
इनमें से कई सदस्यों ने कलेक्टर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को आवेदन देकर विवादित संकल्प पर तत्काल रोक लगाने, बिलों की निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
आवेदन में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 85(1) का हवाला देते हुए विवादित संकल्प के क्रियान्वयन को सक्षम प्राधिकारी से तत्काल निलंबित करने का अनुरोध किया गया है। सदस्यों का तर्क है कि यदि किसी संकल्प के विधि-विरुद्ध होने या उसके क्रियान्वयन से पंचायत निधि को नुकसान पहुंचने की आशंका के आधार मिलते हैं, तो संबंधित प्राधिकारी को कानून के अनुसार हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने धारा 85(2) के तहत आगे की प्रक्रिया अपनाने और धारा 66(4) के संदर्भ में बजट, विस्तृत कार्ययोजना तथा वित्तीय स्वीकृति की स्थिति जांचने की भी मांग की है।
अन्य संदिग्ध बिलों पर भी उठे सवाल
शिकायत में सिर्फ वृक्षारोपण बिलों तक सीमित नहीं है। कार्यालय की साज-सज्जा और उपकरण खरीदी के नाम पर पेश किए गए 2 लाख 75 हजार रुपए के बिल पर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि इस खरीदी में क्रय समिति के अनुमोदन को लेकर आपत्ति उठाई गई थी। वाहन किराये के बिलों में लॉगबुक जैसे जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। देशमुख ट्रेवल्स के 18,900, 9,500 और 11,400 रुपए तथा प्रदीप धनकर टूर एंड ट्रेवल्स के 9,000 और 4,700 रुपए के बिलों का उल्लेख है।
इसके अलावा अर्हम इंटरप्राइजेज के 39,450 रुपए के बिल को पिछले साल के विविध खर्च के नाम पर प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, यह राशि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बाथरूम की मरम्मत संबंधी सामग्री से जुड़ी है। आम के पौधों की 250 रुपए प्रति नग दर, लोहे के एंगल और ट्री गार्ड के लिए 19,780 तथा 28,000 रुपए के बिलों का भी उल्लेख है। 7,500 रुपए के मजदूरी बिल के साथ प्राक्कलन और मस्टर रोल उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है। जैन होटल और मनोहर चाय के बिल उत्सव एवं त्योहारों के दौरान चाय-नाश्ते के खर्च से संबंधित बताए गए हैं।
आठ मांगों के साथ जांच की गुहार
असहमति जताने वाले सदस्यों ने प्रशासन से आठ प्रमुख मांगें की हैं—बिल क्रमांक 51, 54 और 55 सहित संबंधित लंबित देयकों के भुगतान पर जांच पूरी होने तक अंतरिम रोक; यदि भुगतान हो चुका है तो उसकी वैधता और संभावित वित्तीय क्षति की जांच कर वसूली; संकल्प में वैधानिक दोष पाए जाने पर उसे निरस्त या अपास्त करना; स्वतंत्र अधिकारी की अध्यक्षता में जांच; मूल बिल, भुगतान वाउचर, बैंक विवरण, स्टॉक रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना; वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई; संभावित वित्तीय क्षति की वसूली; और अंतरिम कार्रवाई, जांच की प्रगति तथा अंतिम निर्णय की जानकारी आवेदकों को लिखित रूप में देना।




