दो-तिहाई से अधिक जनपद सदस्य मीटिंग की विडियो रिकार्डिंग करने की मांग
23 अक्टूबर की बैठक से पहले कलेक्टर से लिखित निर्णय की मांग, वित्तीय अधिकारों और प्रभार की वैधानिकता पर उठाए सवाल
खैरागढ. जनपद पंचायत छुईखदान में प्रभारी CEO के पद पर पदस्थ तृतीय श्रेणी कर्मचारी को हटाने की मांग को लेकर दो-तिहाई से अधिक निर्वाचित जनपद सदस्यों ने कलेक्टर केसीजी को पत्र सौंपा है। पत्र की प्रतिलिपि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, संचालक पंचायत, नवा रायपुर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल को भी भेजी गई है। सदस्यों ने 23 अक्टूबर 2026 को होने वाली सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा की बैठक से पहले प्रभारी CEO के प्रभार की वैधानिकता, वित्तीय अधिकारों तथा सामान्य प्रशासन समिति के सचिवीय दायित्वों पर लिखित एवं कारणयुक्त निर्णय लेने की मांग की है। सदस्यों का आरोप है कि अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी को जनपद पंचायत का संपूर्ण प्रभार सौंपे जाने से प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी को निलंबित करने का प्रस्ताव जनपद पंचायत से पारित हो चुका है।
जनपद सदस्यों ने अपने पत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आदेश क्रमांक ESTB/4459/2025-P&R D और वित्त विभाग के 21 जुलाई 2025 के पत्र का उल्लेख करते हुए प्रभारी CEO के प्रभार तथा आहरण-संवितरण अधिकारी के अधिकारों की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। सदस्यों का आरोप है कि 27 मार्च और 8 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन एवं जिला पंचायत कार्यालय को जानकारी देने तथा 17 सितंबर को आधे से अधिक निर्वाचित सभापतियों और सदस्यों द्वारा आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रभार आदेश पर अंतिम निर्णय में समय लगता है, तो तब तक वित्तीय प्रभार किसी सक्षम अधिकारी को सौंपने की कार्रवाई की जाए। सामान्य प्रशासन समिति के सचिवीय अधिकारों को लेकर भी छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 47 तथा स्थायी समितियों से संबंधित नियमों के तहत स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
पत्र में सदस्यों ने आरोप लगाया है कि संचार एवं संकर्म स्थायी समिति की 8 सितंबर और 8 अक्टूबर 2026 की बैठकों में नस्तियों का अवलोकन कराने से इनकार किया गया। इस संबंध में समिति के सचिव द्वारा 9 अक्टूबर को जिला पंचायत CEO को पत्र भेजे जाने का उल्लेख भी किया गया है। सदस्यों ने यह आशंका जताई है कि 23 अक्टूबर की सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा की बैठकों के दौरान किसी घटना या कार्यवाही को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है और निर्वाचित सदस्यों के खिलाफ आपराधिक शिकायत की स्थिति बन सकती है। इसी आशंका के चलते उन्होंने दोनों बैठकों की शुरुआत से समापन तक वीडियोग्राफी कराने, जिला प्रशासन के किसी सक्षम राजपत्रित अधिकारी को पर्यवेक्षक नियुक्त करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है। पत्र में पूर्व में एक जनपद सदस्य के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरण का भी उल्लेख किया गया है।
जनपद सदस्यों ने प्रभारी CEO पर कई अन्य मामलों में भी मनमानी करने का आरोप लगाया है। इनमें 15वें वित्त आयोग की राशि से स्वीकृत कार्य निरस्त कर राशि रिस्टोर करना, जनमन योजना के अधूरे आंगनबाड़ी भवनों के पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करना, जनपद पंचायत के पुराने कार्यालय भवन में बिना अनुमति तोड़फोड़, बिना प्राक्कलन और तकनीकी मार्गदर्शन के निर्माण कार्य, ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोकना, गार्बेज रिक्शा खरीदी के सत्यापन में कथित अनियमितता तथा जेम पोर्टल से खरीदी की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी जैसे मामले शामिल हैं। सदस्यों ने इन सभी शिकायतों पर अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई करने और 23 अक्टूबर की बैठक से पहले प्रभार की वैधानिकता तथा वित्तीय अधिकारों पर लिखित निर्णय देने की मांग की है।




