छुईखदान जनपद में भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं, अपने ही सदस्यों की बगावत से घिरी सत्ता
अध्यक्ष गुट और भाजपा समर्थित सदस्यों के बीच खिंची तलवारें, प्रभारी सीईओ को लेकर खुलकर सामने आई गुटबाजी; संगठन की पकड़ पर उठने लगे सवाल
खैरागढ़। छुईखदान जनपद पंचायत में प्रभारी सीईओ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक खींचतान से आगे बढ़कर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बनता दिखाई दे रहा है। जनपद में भाजपा से जुड़े सदस्यों के बीच उभरती नाराजगी और अध्यक्ष गुट के साथ बनती दूरी ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिस जनपद पंचायत में भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों से एकजुट होकर काम करने की उम्मीद की जाती है, वहीं अब सीईओ को लेकर अलग-अलग गुट आमने-सामने नजर आ रहे हैं। प्रभारी सीईओ को हटाने की मांग और सदस्यों की ओर से अधिकारियों को शिकायतें भेजे जाने से यह सवाल उठने लगा है कि आखिर भाजपा अपने ही जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल क्यों नहीं बना पा रही है?
प्रभारी सीईओ के मुद्दे पर अध्यक्ष गुट और विरोध कर रहे सदस्यों के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं
एक ओर अध्यक्ष के समर्थकों का रुख अलग बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर भाजपा से जुड़े कई जनपद सदस्य प्रभारी सीईओ की कार्यप्रणाली और उन्हें दिए गए प्रभार को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सदस्यों की ओर से कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों की वैधानिकता पर निर्णय लेने की मांग किए जाने से विवाद की गंभीरता बढ़ गई है। यह स्थिति केवल एक अधिकारी को लेकर असहमति तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि जनपद के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर भी सवाल खड़े कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल भाजपा संगठन की भूमिका को लेकर है
यदि जनपद पंचायत में पार्टी से जुड़े जनप्रतिनिधि ही अलग-अलग खेमों में बंटकर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो रहे हैं, तो क्या संगठन इस नाराजगी को समय रहते दूर नहीं कर पाया? क्या अध्यक्ष और सदस्यों के बीच संवाद की कमी ने विवाद को इतना बढ़ा दिया कि अब मामला प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गया है? जनपद के भीतर बनती यह स्थिति भाजपा के लिए असहज मानी जा रही है, क्योंकि विपक्ष को सरकार और संगठन पर सवाल उठाने का मौका मिल रहा है। हालांकि, गुटों के बीच मतभेद की वास्तविक वजह और इसके पीछे की राजनीतिक परिस्थितियां संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
फिलहाल छुईखदान जनपद पंचायत में प्रभारी सीईओ को लेकर जारी विवाद ने भाजपा की स्थानीय एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं
एक तरफ अध्यक्ष गुट और दूसरी तरफ विरोध कर रहे सदस्य—इस टकराव का समाधान नहीं निकला, तो इसका असर आगामी सामान्य सभा और सामान्य प्रशासन समिति की बैठकों में भी दिखाई दे सकता है।
भावेश कोचर मंडल अध्यक्ष, भाजपा, छुईखदान (सीधी बात )
सवाल: छुईखदान जनपद पंचायत में भाजपा के जनपद सदस्यों के बीच गुटबाजी की खबरें सामने आ रही हैं। इस पर संगठन की क्या भूमिका है?
जवाब: मैंने भी अखबारों में इस तरह की खबरें पढ़ी थीं। इसके बाद अपने मंडल क्षेत्र के सभी जनपद सदस्यों को बुलाकर सामान्य चर्चा की थी, ताकि मुझे भी पूरे मामले की जानकारी मिल सके।
सवाल: क्या चर्चा के दौरान सदस्यों ने किसी तरह की नाराजगी या मतभेद की बात बताई?
जवाब: सदस्यों ने पार्टी के साथ रहने की बात कही है। मुझे ऐसा नहीं लगता कि यह कोई बहुत बड़ा विवाद है। मुझे आपसी संवाद की कमी नजर आती है, जिसे बातचीत के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।
सवाल: छुईखदान ब्लॉक में तीन मंडल आते हैं। क्या आपने दूसरे मंडलों के अध्यक्षों से भी इस संबंध में चर्चा की है?
जवाब: नहीं, मेरी दूसरे मंडलों के अध्यक्षों से इस विषय पर चर्चा नहीं हुई है। मैंने अपने मंडल क्षेत्र के जनपद सदस्यों को ही सामान्य चर्चा के लिए बुलाया था।
सवाल: आरोप लग रहे हैं कि जनपद सदस्य नहीं होने के बावजूद कुछ भाजपा नेता उनके कामकाज में दखल दे रहे हैं। क्या यह बात संगठन की चर्चा में सामने आई?
जवाब: नहीं, मेरी जानकारी में इस तरह की कोई बात सामने नहीं आई है। मैंने सदस्यों से चर्चा की थी, लेकिन जनपद सदस्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप किए जाने जैसी कोई बात मुझे नहीं बताई गई।
सवाल: लगातार विवाद की खबरों के बीच क्या आपको लगता है कि भाजपा के जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी है?
जवाब: मुझे लगता है कि थोड़ा-बहुत कम्युनिकेशन गैप हो सकता है। आपस में बातचीत होने से इसे सुलझाया जा सकता है। पार्टी के सदस्य संगठित हैं और बातचीत के माध्यम से स्थिति सामान्य हो सकती है।




