आरक्षण की लॉटरी से उपाध्यक्ष सहित 4 पार्षदों का टिकट साफ, 15 दावेदारों के लिए मैदान खुला

आरक्षण की लॉटरी से उपाध्यक्ष सहित 4 पार्षदों का टिकट साफ, 15 दावेदारों के लिए मैदान खुला

वार्ड आरक्षित होते ही बदले चुनावी समीकरण, बाकी पार्षद फिर मैदान में उतरने की तैयारी में; गिरिजानंद चंद्राकर की अध्यक्ष पद पर भी नजर

खैरागढ़. नगर पालिका चुनाव के लिए हुए वार्ड आरक्षण ने कई मौजूदा पार्षदों की चुनावी राह बदल दी है। आरक्षण प्रकिया पूरी होने के बाद दिलीप राजपूत, रेखा विकेश गुप्ता, विनय देवांगन, अब्दुल रज्जाक खान और दिलीप लहरे के मौजूदा वार्ड ऐसी श्रेणी में चले गए हैं, जिसके चलते इन पांचों का अपने वर्तमान वार्ड से टिकट ऑटोमैटिक कट गया माना जा रहा है। अब पार्टी इन्हें दूसरे वार्ड से मौका देती है या नहीं, यह अलग बात होगी, लेकिन मौजूदा वार्ड से चुनाव लड़ने की संभावना आरक्षण ने खत्म कर दी है।

15 पार्षदों की दावेदारी बरकरार, फिर मैदान में उतरने की तैयारी

वहीं बाकी 15 वर्तमान पार्षदों के लिए आरक्षण ने चुनावी मैदान खुला रखा है। इनमें टिकेश्वरी पटेल, शैलेंद्र वर्मा, सुमित टंडिया, सुमन दयाराम पटेल, मोनिका रजक, अजय जैन, दीपक देवांगन, त्रिवेणी देवांगन, रूपेंद्र रजक, गिरिजानंद चंद्राकर, पुरुषोत्तम वर्मा, देवीन कमलेश कोठले, शत्रुघ्न धृतलहरे, पुष्पा सिंदूर और चंद्रशेखर यादव (अधिवक्ता) के नाम शामिल हैं। आरक्षण के बाद इन चेहरों को अपने-अपने वार्ड से दोबारा पार्षद बनने के प्रबल दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी टिकट वितरण के बाद ही होगा।

गिरिजानंद चंद्राकर को लेकर अध्यक्ष पद की चर्चा भी तेज

इन 15 नामों में गिरिजानंद चंद्राकर को लेकर राजनीतिक चर्चा कुछ ज्यादा तेज है। वार्ड 12 सामान्य मुक्त होने के बाद उनके दोबारा पार्षद का चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही चुनाव जीतने की स्थिति में नगर पालिका अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर भी उनका नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है। हालांकि अध्यक्ष पद के लिए उनकी ओर से कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन आरक्षण के बाद संभावित अध्यक्ष दावेदारों को लेकर शुरू हुई चर्चाओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

पांच के सामने दूसरे वार्ड की चुनौती, 15 पर टिकट की नजर

आरक्षण के बाद अब खैरागढ़ की चुनावी राजनीति में अगला बड़ा पड़ाव टिकट वितरण होगा। पांच मौजूदा पार्षदों के सामने जहां दूसरे वार्ड से राजनीतिक जमीन तलाशने की चुनौती है, वहीं 15 पार्षदों और संभावित दावेदारों की नजर अपने वार्ड से टिकट पर टिकी है। आरक्षण ने पुराने चेहरों के बीच भी मुकाबले की तस्वीर बदल दी है और अब भाजपा-कांग्रेस संगठन के फैसले पर सबकी निगाहें हैं। खासकर अध्यक्ष पद की संभावित दौड़ ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।