बुधवार को होगा कलेक्टोरेट घेराव, विधायक, सरपंच सहित ग्रामीण होंगे शामिल

बुधवार को होगा कलेक्टोरेट घेराव, विधायक, सरपंच सहित ग्रामीण होंगे शामिल

खैरागढ़. जिले की मूलभूत समस्याओं को लेकर बुधवार 18 सितंबर को प्रस्तावित कलेक्टोरेट घेराव में ग्रामीणों के साथ सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में शामिल होने की तैयारी में हैं। डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने 12 सितंबर को कलेक्टर KCG को पत्र भेजकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन एवं कलेक्टोरेट घेराव की पूर्व सूचना दी है। पत्र में सड़क, पेयजल, बिजली, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, रोजगार, आवास और राशन सहित विभिन्न मूलभूत समस्याओं के निराकरण की मांग उठाई गई है।

गांव का विकास करना है, लेकिन पंचायतों के पास फंड नहीं

आंदोलन को लेकर कई सरपंचों में भी नाराजगी सामने आ रही है। सरपंचों का कहना है कि उन्हें ग्रामीणों ने गांव के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन पंचायतों को पर्याप्त राशि और काम नहीं मिलने के कारण वे चाहकर भी ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। नाली की सफाई, पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी पंचायतों को राशि का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों की नाराजगी का सामना सीधे सरपंचों को करना पड़ रहा है।

सरपंच बोले- काम नहीं दे सकते तो इस्तीफा ही बेहतर

कई सरपंचों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वे लगातार दबाव में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि "हम सरपंच गांव के विकास के लिए बने हैं, लेकिन जब पंचायत के पास काम कराने के लिए फंड ही नहीं होगा तो विकास कैसे होगा।" कुछ सरपंचों का कहना है कि यदि पंचायतों को काम और पर्याप्त राशि नहीं दी गई तो उनके सामने इस्तीफा देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। आंदोलन को वे सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने और पंचायतों को पर्याप्त काम व राशि उपलब्ध कराने के लिए एक तरह का अल्टीमेटम मान रहे हैं।

अनुभवी सरपंच बोले- पहले छोटे काम भी हो जाते थे, अब दस लाख का काम भी मुश्किल

आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे अनुभवी सरपंचों का कहना है कि पूर्व के शासनकाल में पंचायतों को किसी न किसी रूप में विकास कार्य मिलते रहते थे, जिससे गांव की छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी की जा सकती थीं। उनका आरोप है कि वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि पंचायतें दस लाख रुपए के काम के लिए भी परेशान हैं। इसका सीधा असर गांवों की व्यवस्था पर पड़ रहा है। ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी सरपंचों को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में बुधवार का कलेक्टोरेट घेराव केवल ग्रामीण समस्याओं का आंदोलन नहीं, बल्कि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार, काम और फंड उपलब्ध कराने की मांग का भी बड़ा प्रदर्शन बनने की संभावना है।