जिस गार्डनिंग को PWD ने अपना काम बताया, कलेक्टर कार्यालय बोला- यह तो जनसहयोग से हो रहा है!
भास्कर की खबर के बाद सामने आया नया तथ्य; मजदूर से लेकर ईंट, पौधे और पेड़ तक अलग-अलग विभाग दे रहे सहयोग, अब पीडब्लूडी ने जांच टीम गठित करने की बात कही
खैरागढ़. रेस्ट हाउस, कलेक्टर कार्यालय और सिविल लाइन के शासकीय भवनों में गार्डनिंग के नाम पर 10 लाख रुपए से ज्यादा के भुगतान को लेकर प्रकाशित खबर के बाद मामले में नया मोड़ सामने आया है। पीडब्लूडी खैरागढ़ ने सीएम हेल्पलाइन में दिए जवाब में रेस्ट हाउस, कलेक्टर कार्यालय और सिविल लाइन के शासकीय भवनों में गार्डनिंग कार्य के लिए भुगतान की जानकारी दी थी। लेकिन जब दैनिक भास्कर ने कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों से मौके पर चल रहे गार्डनिंग कार्य के संबंध में जानकारी ली तो अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर कार्यालय परिसर में गार्डनिंग का काम जनसहयोग से कराया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर सहयोग कर रहे हैं। कोई विभाग मजदूर उपलब्ध करा रहा है, तो कहीं से ईंट, कहीं से पेड़-पौधे और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

जब काम जनसहयोग से हो रहा तो पीडब्लूडी के भुगतान का हिसाब क्या?
कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों की जानकारी सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल पीडब्लूडी के उस जवाब को लेकर खड़ा हो गया है, जिसमें गार्डनिंग कार्य के लिए ठेकेदार को भुगतान किए जाने की बात कही गई थी। सवाल यह है कि यदि कलेक्टर कार्यालय में गार्डनिंग का काम अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के सहयोग से हो रहा है, तो विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज गार्डनिंग कार्य के तहत वहां वास्तव में क्या काम कराया गया और उसका भुगतान किस काम के एवज में किया गया? वहीं सिविल लाइन क्षेत्र के शासकीय भवनों में भी मौके पर बड़े स्तर पर गार्डनिंग कार्य होने की स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई देने की बात सामने आई है। इससे भुगतान रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर का सवाल और गहरा गया है।
पीडब्लूडी अब खुद करेगा साइट विजिट, टीम से कराएगा वेरिफिकेशन
मामले में प्रभारी एसडीओ तुलसी राम जोशी ने बताया कि यह पूर्व में कराया गया कार्य है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं साइट विजिट करेंगे और मौके की स्थिति देखने के बाद निष्कर्ष निकालेंगे। उनके अनुसार पहले सीएम पोर्टल में शिकायत के बाद सब-इंजीनियर की ओर से जवाब दिया गया था, जिसे उन्होंने आगे भेजा था। उच्च अधिकारियों से चर्चा के बाद उन्हें टीम गठित कर वेरिफिकेशन कराने के निर्देश मिले हैं। एसडीओ के मुताबिक टीम के सत्यापन के बाद ही मामले में सही निष्कर्ष के आधार पर जवाब दिया जाएगा। यानी अब पीडब्लूडी के अपने अधिकारी ही विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज कार्य और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान करेंगे।

भास्कर की खबर के बाद बढ़ी हलचल, शिकायतकर्ताओं ने मांगी गहन जांच
इधर आलोक श्रीवास, मंदीप सहित अन्य लोगों ने पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि गार्डनिंग कार्य के नाम पर भुगतान हुआ है तो उसका स्पष्ट हिसाब मौके पर दिखाई देना चाहिए। खासकर कलेक्टर कार्यालय में यदि वर्तमान गार्डनिंग जनसहयोग से हो रही है, तो पहले दर्ज किए गए भुगतान से संबंधित कार्य की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। अब मामला केवल भुगतान के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि किस स्थान पर कौन-सा काम हुआ, किसके माध्यम से हुआ और भुगतान किस कार्य के आधार पर किया गया, यह सवाल जांच के केंद्र में आ गया है।




