जिला कार्यक्रम अधिकारी पर मंत्री के नाम का कथित इस्तेमाल कर गुमराह करने का आरोप

जिला कार्यक्रम अधिकारी पर मंत्री के नाम का कथित इस्तेमाल कर गुमराह करने का आरोप

मंत्री के सामने खुली महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘पोल’, जनप्रतिनिधियों ने लगाए गंभीर आरोप

खरीदी से लेकर खादी के सामूहिक विवाह तक उठे सवाल; मंत्री ने तत्काल जांच के दिए निर्देश

पहले ही दौरे में शिकायतों की लगी झड़ी

खैरागढ़. महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के खैरागढ़ जिले के प्रथम आगमन पर रेस्ट हाउस में भाजपा कार्यकर्ताओं, भाजपा जनप्रतिनिधियों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा रहा। इसी दौरान जनपद पंचायत खैरागढ़ के सभापतियों एवं सदस्यों ने महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर मंत्री के समक्ष गंभीर शिकायतें रखीं। शिकायतों में जिला कार्यक्रम अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जनप्रतिनिधियों को कथित रूप से गुमराह करने तथा विभागीय मामलों में मंत्री के नाम का इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगाए गए।

‘मंत्री जी के यहां से आया है’—जनप्रतिनिधियों का आरोप

जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि विभाग में पेन, साबुन, सोडा, झाड़ू सहित अन्य सामान की खरीदी को लेकर जब सवाल किया जाता है कि सामान कहां से आया, किसने खरीदा, कितनी मात्रा में खरीदा, किस दर पर खरीदा और किस प्रक्रिया से खरीदा गया, तो कथित रूप से स्पष्ट जवाब देने के बजाय ‘मंत्री जी के यहां से आया है’ अथवा ऊपर से तय होने की बात कही जाती है। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यदि वास्तव में मंत्री कार्यालय से कोई सामग्री या निर्देश आया है तो उसका अधिकृत आदेश, बिल, चालान, डिस्पैच रिकॉर्ड और स्टॉक एंट्री सामने आनी चाहिए। यदि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है तो मंत्री के नाम का कथित इस्तेमाल कर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।

खादी के सात परिवारों के विवाह पर गंभीर शिकायत

वहीं जनपद पंचायत छुईखदान के ग्राम खादी में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने गंभीर शिकायत मंत्री के समक्ष रखी। शिकायत के अनुसार वहां सात परिवारों का विवाह कराया जाना था, लेकिन वास्तविक विवाह कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। आरोप है कि मौके पर न टेंट-पंडाल की व्यवस्था की गई और न ही विवाह के अनुरूप आयोजन हुआ, बल्कि केवल फोटोशूट कराकर औपचारिकता पूरी किए जाने की शिकायत की गई है। इसके साथ ही विवाह हितग्राहियों को उपलब्ध कराई गई सामग्री की गुणवत्ता घटिया होने का भी आरोप लगाया गया है। जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए हितग्राही सूची, फोटो-वीडियो, सामग्री वितरण रिकॉर्ड, बिल-वाउचर और कार्यक्रम पर हुए खर्च का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

छुईखदान के जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन

बताया गया कि खैरागढ़ के जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए आरोपों को छुईखदान जनपद क्षेत्र के कई सभापतियों एवं सदस्यों का भी समर्थन मिला। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विभागीय योजनाओं में यदि लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। खासकर मंत्री के नाम का कथित रूप से उपयोग कर किसी विभागीय व्यवस्था या निर्णय को सही ठहराने की कोशिश होती है तो इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है।

मंत्री ने पीए-पीएसओ को बुलाकर दिए जांच के निर्देश

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने तत्काल अपने पीए और पीएसओ को बुलाकर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जनप्रतिनिधियों के अनुसार जिला कार्यक्रम अधिकारी को लेकर पूर्व में भी कई शिकायतें और पत्राचार किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी है। मंत्री के समक्ष शिकायत पहुंचने और तत्काल जांच के निर्देश दिए जाने के बाद अब विभागीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर नजर है।

‘मंत्री के नाम का इस्तेमाल’—सरकार की छवि पर भी सवाल

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से बदनाम करना नहीं, बल्कि योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है। यदि वास्तव में मंत्री कार्यालय से कोई निर्देश अथवा सामग्री भेजी गई है तो उसका रिकॉर्ड सामने आना चाहिए और यदि ऐसा नहीं है तो मंत्री के नाम का कथित इस्तेमाल कर जनप्रतिनिधियों को गुमराह किए जाने की जांच होनी चाहिए। शिकायतकर्ताओं ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को जिले से हटाने अथवा स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग भी रखी है।

सवाल-जवाब में मंत्री से उठे आंगनबाड़ी के जर्जर भवन, पंजी और सुपरवाइजरों पर कमीशनखोरी के मुद्दे

पत्रकार: मैम, जिले में बहुत सारे आंगनबाड़ी भवन जर्जर हैं और कई आंगनबाड़ी केंद्र भवनविहीन भी हैं। कुछ जगहों पर बच्चों की पढ़ाई मंचों पर चलने की भी बात सामने आ रही है?

मंत्री: देखिए, मंच पर आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे पढ़ रहे हैं, ऐसी कोई शिकायत अभी तक मेरे पास नहीं आई है। यह जरूर हो सकता है कि भवन नहीं होने या जर्जर होने की वजह से बच्चे किसी निजी कमरे में पढ़ रहे हों। ठंड के मौसम में ठंड अधिक होने पर किसी पेड़ के नीचे या धूप में बैठाए जाने की स्थिति अलग बात है। लेकिन नए जिले के गठन के साथ हमारी प्राथमिकता है कि जहां भवन कम हैं या जर्जर हैं, वहां अधिक से अधिक नए भवन स्वीकृत किए जाएं।

पत्रकार: आंगनबाड़ी में कई तरह के पंजी बनाए जाते हैं, जैसे चखना पंजी, सुपोषण पंजी, वजन, उपस्थिति और अन्य पंजी। शिकायत है कि इन पंजी के लिए कार्यकर्ताओं को राशि नहीं दी जाती और वे अपने निजी खर्च से पंजी खरीदते हैं। इस संबंध में जिले में शिकायत भी की गई है?

मंत्री: नहीं, आंगनबाड़ी केंद्र में ऐसा कोई पंजी नहीं बनता है।

पत्रकार: मैम, सुपरवाइजरों पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं। कार्यकर्ताओं से दबावपूर्वक काम लेने और अनुबंध के नाम पर एक हजार रुपए की वसूली किए जाने की शिकायत भी सामने आई है?

मंत्री: अगर ऐसा कोई विषय है और मेरे पास इसकी शिकायत नहीं आई है तो आप आवेदन दीजिए। आवेदन मिलने पर मैं निश्चित रूप से उस पर कार्रवाई के लिए निर्देशित करूंगी।