विकास कार्यों के लिए पैसा नहीं, शिविरों के टेंट-पंडाल पर लाखों खर्च!

विकास कार्यों के लिए पैसा नहीं, शिविरों के टेंट-पंडाल पर लाखों खर्च!

जनपद पंचायत में 10.77 लाख और समाज कल्याण विभाग में 3.17 लाख के भुगतान का मामला, सरपंचों सहित जनपद सदस्यों ने उठाए सवाल

खैरागढ़. गांवों में नाली, सड़क और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए राशि की कमी बताई जाती है, वहीं दूसरी ओर शिविरों और आयोजनों के टेंट-पंडाल पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जनपद पंचायत खैरागढ़ के रिकॉर्ड के अनुसार जनसमस्या निवारण शिविर, राज्यपाल के गोद ग्राम सोनपुरी में आयोजित कार्यक्रम और सुशासन तिहार के नाम पर कुल 10 लाख 77 हजार 265 रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं, समाज कल्याण विभाग ने सोनपुरी में अलग से शिविर लगाने के नाम पर 3 लाख 17 हजार 813 रुपये खर्च किए हैं। इस तरह दोनों विभागों के इन आयोजनों पर कुल 13 लाख 95 हजार 78 रुपये खर्च होने का मामला सामने आया है। सवाल यह है कि जब गांवों में बुनियादी सुविधाओं के लिए सरपंच राशि की कमी से जूझ रहे हैं, तब आयोजनों पर इस तरह के खर्च की प्राथमिकता कितनी उचित है?

जनसमस्या शिविर पर 3.01 लाख, सोनपुरी में 6.19 लाख खर्च

जनपद पंचायत के रिकॉर्ड में दर्ज भुगतान के अनुसार, जनसमस्या निवारण शिविर के लिए 3 लाख 1 हजार 59 रुपये खर्च किए गए। इसमें 27 सितंबर 2024 को ग्राम गातापार जंगल में आयोजित शिविर के लिए 1 लाख 59 हजार 680 रुपये तथा 10 अक्टूबर 2024 को ग्राम सिंघौरी में आयोजित शिविर के लिए 1 लाख 41 हजार 379 रुपये का भुगतान शामिल है। वहीं, राज्यपाल के गोद ग्राम सोनपुरी में आगमन के दौरान शमियाना, वाटरप्रूफ पंडाल और मंच सहित अन्य व्यवस्थाओं पर 6 लाख 19 हजार 62 रुपये खर्च किए गए। इसमें 25 एवं 26 जून 2025 के लिए 3 लाख 64 हजार 672 रुपये और 25 अगस्त 2025 के लिए 2 लाख 54 हजार 390 रुपये शामिल हैं।

सोनपुरी का राज्यपाल दौरा के दौरान कार्यक्रम की तस्वीर

सुशासन तिहार के नाम पर 1.57 लाख, समाज कल्याण विभाग का अलग खर्च

एक ही आयोजन नहीं, अलग-अलग मदों में खर्च का सवाल भी चर्चा में है। जनपद पंचायत के रिकॉर्ड के अनुसार सुशासन तिहार की व्यवस्थाओं के लिए 1 लाख 57 हजार 144 रुपये का भुगतान दर्ज है। इसमें वर्ष 2026-27 के लिए 72 हजार 252 रुपये और वर्ष 2025-26 के लिए 77 हजार 660 रुपये दर्शाए गए हैं,  दूसरी ओर, समाज कल्याण विभाग ने सोनपुरी में अलग से शिविर लगाने के लिए 3 लाख 17 हजार 813 रुपये का भुगतान किया है। विभागवार खर्च सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि आयोजनों की व्यवस्थाओं पर अलग-अलग विभागों से हुए भुगतान का औचित्य और वास्तविक कार्यों का सत्यापन किस तरह किया गया।

विकास कार्यों के लिए तरस रहे गांव, सरपंचों ने जताई नाराजगी

जमीनी जरूरतों के बीच खर्च की प्राथमिकता पर सवाल उठ रहे हैं। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर एक सरपंच ने आरोप लगाया कि गांवों में छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए राशि जुटाना मुश्किल हो रहा है, जबकि शिविरों के पंडाल पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे कमीशनखोरी से जोड़ते हुए जांच की मांग की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 

कांग्रेस के जनपद सदस्य आकाशदीप गोल्डी ने कहा कि शिविरों में लगाए गए पंडाल और व्यवस्थाओं को उन्होंने स्वयं देखा है। उनका आरोप है कि खर्च की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले में निचले स्तर पर शिकायत करने के बजाय न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर कार्रवाई की मांग की जाएगी। भुगतान की राशि और आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए बिल, दरों, कार्यों की मात्रा और भुगतान प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

अनुमोदित दरों पर भुगतान, प्रतिपूर्ति के लिए भेजे पत्र- सीईओ 

जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु गुप्ता के अनुसार, जनसमस्या निवारण शिविर और सोनपुरी में राज्यपाल के आगमन की व्यवस्थाओं पर भुगतान लोक निर्माण विभाग, दुर्ग मंडल के अधीक्षण अभियंता द्वारा अनुमोदित दरों के आधार पर किया गया। सीईओ ने बताया कि इन खर्चों की प्रतिपूर्ति के लिए जिला पंचायत केसीजी को पत्र भेजे गए हैं और राशि का आबंटन अपेक्षित है। संबंधित नस्ती और प्रमाणक कार्यालयीन रिकॉर्ड में उपलब्ध होने की बात भी कही गई है।

इस खर्च की कोई जानकारी नहीं है। यदि बिलों का भुगतान हुआ है, तो इसकी जानकारी जनपद पंचायत द्वारा जनप्रतिनिधियों को दी जानी चाहिए। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए, ताकि खर्च की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

खेमराज जैन, जनपद सदस्य