श्री सीमेंट के खिलाफ अब ओबीसी महासंघ की हुंकार, कहा—किसानों की जमीन की कीमत पर विकास मंजूर नहीं
प्रेस वार्ता में 90% से अधिक ओबीसी परिवारों का हवाला, पुनः जनसुनवाई रोकने और परियोजना स्थायी रूप से निरस्त करने की मांग; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
खैरागढ़. दनिया-अतरिया-हनईबन-उदयपुर क्षेत्र में प्रस्तावित श्री सीमेंट फैक्ट्री एवं चूना पत्थर खनन परियोजना के विरोध में अब अन्य पिछड़ा वर्ग महासंघ भी खुलकर सामने आ गया है। गुरुवार को जिला पत्रकार संघ भवन में प्रेस वार्ता लेकर महासंघ ने परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक कीं और स्पष्ट कहा कि किसानों की कृषि भूमि, आजीविका, जलस्रोत, पर्यावरण और पूर्वजों की विरासत की कीमत पर किसी भी औद्योगिक परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रेस वार्ता में अमर यादव,
टिलेश्वर साहू, कपिनाथ महोबिया, हर्ष दासरिया निलेश यादव सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। इसके बाद महासंघ की ओर से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर परियोजना की पुनः जनसुनवाई नहीं कराने और इसे स्थायी रूप से निरस्त करने की मांग की गई।
“90 फीसदी से अधिक ओबीसी परिवार, हजारों एकड़ जमीन का सवाल”—महासंघ ने उठाई सामाजिक चिंता
महासंघ ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि प्रस्तावित परियोजना वाले परिक्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग के किसान एवं ग्रामीण परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। महासंघ का कहना है कि हजारों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने से इसका असर केवल जमीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक संरचना और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर पड़ेगा। ज्ञापन में कृषि भूमि को पूर्वजों की विरासत और सामाजिक पहचान बताते हुए कहा गया कि खेती की जमीन को बड़े पैमाने पर औद्योगिक उपयोग में बदलना क्षेत्र के किसानों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
जल, पर्यावरण और खेती पर संभावित असर का हवाला, परियोजना पर उठाए सवाल
महासंघ ने खनन और सीमेंट फैक्ट्री से धूल, वायु एवं जल प्रदूषण, ब्लास्टिंग, भूजल स्तर में कमी तथा जलस्रोतों पर संभावित दबाव को लेकर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि कृषि प्रधान क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाला कोई भी दीर्घकालीन प्रभाव सीधे किसानों की आजीविका को प्रभावित करेगा। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 21, 48A और 51A(g) का उल्लेख करते हुए पर्यावरण और स्वस्थ जीवन के अधिकार की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। महासंघ ने कहा कि परियोजना पर फैसला केवल औद्योगिक निवेश और आर्थिक लाभ को देखकर नहीं, बल्कि किसानों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
“पलायन की नौबत नहीं आने देंगे”—जमीन और सामाजिक अस्तित्व बचाने का ऐलान
महासंघ ने कहा कि किसानों को पुश्तैनी जमीन और आजीविका से वंचित कर पलायन के लिए मजबूर करने वाली स्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी। संगठन ने जमीन खरीद अथवा अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसी किसान पर दबाव, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव डाले जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की। महासंघ ने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं रखता, लेकिन किसानों की जमीन और अधिकारों की कीमत पर परियोजना को आगे बढ़ाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
पुनः जनसुनवाई पर रोक और परियोजना निरस्त करने की मांग
अन्य पिछड़ा वर्ग महासंघ ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में मांग की कि दनिया-अतरिया-हनईबन-उदयपुर सम्पूर्ण परिक्षेत्र में प्रस्तावित श्री सीमेंट परियोजना के संबंध में पुनः जनसुनवाई आयोजित नहीं की जाए। साथ ही किसानों की भूमि, आजीविका और पर्यावरण पर संभावित प्रभाव को देखते हुए परियोजना को स्थायी रूप से निरस्त करने की अनुशंसा राज्य शासन एवं केंद्र सरकार को भेजने की मांग की गई। महासंघ ने प्रशासन से परियोजना से संबंधित आगे की कार्रवाई रोकने तथा ज्ञापन पर की गई कार्रवाई की लिखित और कारणयुक्त जानकारी आवेदकों को देने की मांग भी रखी।
किसान अधिकार संघर्ष समिति को समर्थन, जरूरत पड़ी तो मैदान में उतरने का ऐलान
महासंघ ने किसान अधिकार संघर्ष समिति द्वारा चलाए जा रहे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की बात कही। संगठन ने कहा कि यदि किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर परियोजना को आगे बढ़ाने या जनसुनवाई कराने की कोशिश की गई तो अन्य पिछड़ा वर्ग महासंघ भी किसानों के साथ मैदान में उतरेगा। महासंघ का कहना है कि यह केवल किसी एक गांव या परिवार का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र की कृषि, जल, पर्यावरण और हजारों ग्रामीण परिवारों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।




