पहले मिला पूर्णता प्रमाण-पत्र, बाद में निकला भवन अधूरा—सरकारी फाइलों का गजब खेल
00 पीएम जनमन के आंगनबाड़ी भवनों में ‘पूर्णता’ का पेच
00 पहले पूर्णता प्रमाण-पत्र, फिर धीमी प्रगति का नोटिस; गेरूखदान-चोभर के दो भवनों को लेकर जनपद पंचायत और RES आमने-सामने
खैरागढ़. प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत छुईखदान जनपद की ग्राम पंचायत गेरूखदान और चोभर के आश्रित ग्राम झिलमिली में स्वीकृत दो आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को लेकर सरकारी दस्तावेजों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दोनों भवनों की स्वीकृत लागत करीब 11.69-11.69 लाख रुपए बताई गई है। मामला उस समय गंभीर हुआ, जब एक ओर इन भवनों के कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र (CC) जारी होने के दस्तावेज सामने आए, वहीं दूसरी ओर 27 मई 2026 को जनपद पंचायत छुईखदान के प्रभारी सीईओ ने इन्हीं दोनों भवनों को निर्धारित समय-सीमा के बाद भी अपूर्ण और अत्यंत धीमी गति से निर्माणाधीन बताते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के एसडीओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। यहीं से पूरा मामला ‘काम कितना हुआ’ से आगे बढ़कर ‘जब काम पूरा नहीं था तो पूर्णता प्रमाण-पत्र कैसे जारी हुआ?’ के सवाल में बदल गया।
27 मई को नोटिस: कलेक्टर की नाराजगी का हवाला, दो दिन में जवाब मांगा
27 मई को जारी नोटिस में जनपद पंचायत छुईखदान के प्रभारी सीईओ ने लिखा कि गेरूखदान और चोभर में स्वीकृत आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण अत्यंत धीमी गति से चल रहा है और निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है। नोटिस में समय-सीमा की बैठक का हवाला देते हुए कहा गया कि कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त की है। तकनीकी अमले की लापरवाही और उदासीनता का उल्लेख करते हुए RES के एसडीओ से दो दिन के भीतर विलंब के ठोस कारण और प्रगति रिपोर्ट मांगी गई। लेकिन इसके बाद RES की ओर से जिला पंचायत को भेजे गए पत्र ने मामले को ही नया मोड़ दे दिया।
RES ने कहा—काम अधूरा तो फिर CC किस आधार पर?
RES के एसडीओ ने जिला पंचायत सीईओ को भेजे जवाब में दोनों आंगनबाड़ी भवनों के पूर्णता प्रमाण-पत्रों की प्रतियां प्रस्तुत करते हुए सवाल उठाया कि जब इन कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र पहले ही जारी हो चुके हैं तो फिर इन्हें अपूर्ण बताकर तकनीकी अमले को नोटिस क्यों दिया गया। पत्र में यह भी कहा गया कि तकनीकी रूप से CC जारी होने के बाद मूल्यांकन, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। RES का कहना था कि कार्य शुरू होने में सामग्री परिवहन की समस्या के कारण देरी हुई, लेकिन बाद में काम में तेजी लाई गई और स्लैब ढलाई के बाद प्लास्टर का काम चल रहा था। यानी एक तरफ जनपद कार्यालय के दस्तावेज निर्माण को अपूर्ण बता रहे थे, तो दूसरी तरफ RES के दस्तावेज CC जारी होने की स्थिति सामने रख रहे थे।
11 जून से 19 जून तक मामला और उलझा, आरोपों का जवाब आरोप से
11 जून को जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जनपद पंचायत छुईखदान से गेरूखदान और चोभर के CC जारी होने के संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन मांगा। साथ ही कंटिंजेंसी राशि के नियमानुसार आबंटन और RES के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए बैठने की व्यवस्था के निर्देश दिए। इसके बाद 19 जून को जनपद पंचायत छुईखदान ने अपने प्रतिवेदन में चोभर के पूर्णता प्रमाण-पत्र में कथित कूटकरण/हेरफेर का आरोप लगाया और कहा कि प्रमाण-पत्र में कार्य पूर्ण होने की तारीख का कॉलम पहले खाली था, जिसे बाद में कथित तौर पर भरा गया। जनपद ने यह भी कहा कि दोनों भवनों की वास्तविक स्थिति पूर्ण नहीं थी। इस तरह मामला अब केवल निर्माण की धीमी गति का नहीं रहा, बल्कि पूर्णता प्रमाण-पत्र की वैधता और उसमें की गई प्रविष्टियों तक पहुंच गया।
24 अगस्त को फिर नोटिस, 31 अगस्त को RES का पलटवार
मामले में 24 अगस्त को जिला पंचायत सीईओ ने RES के एसडीओ को फिर नोटिस जारी कर पूर्णता प्रमाण-पत्र में कथित कूटकरण के आरोप पर एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा। इसके जवाब में 31 अगस्त को RES के एसडीओ ने जनपद के आरोपों को निराधार बताते हुए पलटवार किया। जवाब में कहा गया कि यदि कार्य भौतिक रूप से पूर्ण नहीं था तो अपूर्ण कार्य का पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी किया जाना ही गंभीर अनियमितता है। RES ने यह भी तर्क दिया कि प्रमाण-पत्र पर कार्य पूर्णता की तारीख हो या न हो, यदि भवन वास्तव में अधूरा था तो CC जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस जवाब के बाद पूरा मामला एक असामान्य स्थिति में पहुंच गया है, जहां एक ही सरकारी व्यवस्था के दो विभागीय पक्ष एक-दूसरे के दस्तावेज और कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
अब असली सवाल—अधूरे काम का CC किसने, कब और किस आधार पर जारी किया?
दस्तावेजों की पूरी टाइमलाइन में सबसे अहम सवाल यही उभरता है कि गेरूखदान और चोभर के दोनों भवनों की वास्तविक भौतिक स्थिति उस समय क्या थी, जब पूर्णता प्रमाण-पत्र तैयार और अभिप्रमाणित किए गए? CC किसके स्तर से तैयार हुआ, किन अधिकारियों ने उस पर हस्ताक्षर किए, क्या मौके का भौतिक सत्यापन हुआ था, मूल प्रमाण-पत्र में क्या दर्ज था और उसके आधार पर कोई मूल्यांकन अथवा भुगतान हुआ या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है। फिलहाल किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने के बजाय मूल नस्ती, मूल CC, माप पुस्तिका, तकनीकी मूल्यांकन और मौके की स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन ही सच्चाई सामने ला सकता है। पीएम जनमन जैसी महत्वपूर्ण योजना में यदि निर्माण अधूरा था तो पूर्णता प्रमाण-पत्र कैसे बना और यदि प्रमाण-पत्र वैध था तो 27 मई को उसी काम को अपूर्ण और धीमा बताकर नोटिस क्यों जारी हुआ—इन दो सवालों का स्पष्ट जवाब अब जिला प्रशासन की जांच से ही सामने आएगा।
मामला संज्ञान में आया है, जांच कराई जा रही है।
प्रेम कुमार पटेल, सीईओ, जिला पंचायत केसीजी




