छुईखदान जनपद में प्रभारी CEO के DDO पावर पर घमासान, 16 सदस्यों ने खोला मोर्चा
तृतीय श्रेणी कर्मचारी को प्रभार से हटाने और वित्तीय अधिकार वापस लेने की मांग, फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र से लेकर खरीदी प्रक्रिया तक कई शिकायतों का हवाला
खैरागढ़। जनपद पंचायत छुईखदान में प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को दिए गए वित्तीय अधिकारों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जनपद पंचायत के करीब 16 सदस्यों ने एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी को प्रभारी CEO बनाए जाने और उन्हें आहरण-संवितरण अधिकारी (DDO) का पावर दिए जाने पर सवाल उठाते हुए पंचायत विभाग के संचालक, पंचायत मंत्री, जिला पंचायत CEO और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।

सदस्यों ने संबंधित कर्मचारी को प्रभारी CEO के पद से हटाने और उनके वित्तीय अधिकार वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस और भाजपा से जुड़े सदस्यों के एक साथ इस मुद्दे पर सामने आने से जनपद पंचायत की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।



कांग्रेस-भाजपा के 16 सदस्यों ने एकजुट होकर उठाए सवाल
ज्ञापन पर नीना ताम्रकार, रमेश साहू, रिखी पटेल, रीना यदु, मंगलबती ध्रुव, कौशल ठाकरे सहित जनपद पंचायत के करीब 16 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। सदस्यों का आरोप है कि एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी को प्रभारी CEO के साथ DDO पावर देना नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने संबंधित आदेश की समीक्षा कर वित्तीय अधिकार निरस्त करने और प्रभार से हटाने की मांग की है।

शिकायतों की लंबी फेहरिस्त, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
प्रभारी CEO की कार्यप्रणाली को लेकर सदस्यों और शिकायतकर्ताओं की ओर से पहले भी कई मामलों में शिकायत किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि जनमन योजना के तहत निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन के संबंध में अधूरे कार्य के बावजूद पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया गया। इसके अलावा कथित बोगस बजट, ट्राईसाइकिल खरीदी और जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर भी शिकायतें किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, खरीदी प्रक्रिया को लेकर कलेक्टर की आपत्ति के बाद भी मामला जांच और कार्रवाई की प्रतीक्षा में है। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय तक लिखित शिकायत भेजा गया है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर होना बाकी है।

भवन मरम्मत से लेकर वाटर कूलर खरीदी तक सवाल
जनपद पंचायत कार्यालय भवन के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार से जुड़े 10.24 लाख रुपये के दो कार्य भी विवाद के केंद्र में हैं। कार्यालय के 22 सितंबर 2026 के निरस्तीकरण आदेश के अनुसार, संबंधित कार्यों के लिए कार्यादेश जारी नहीं हुआ था और भुगतान भी नहीं किया गया था। दूसरी ओर, आरोप है कि करीब 25 वर्ष पुराने भवन की छत की बाउंड्री या पैरापेट तोड़कर ढलाई का काम कराया गया। इससे निर्माण की अनुमति, तकनीकी निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
इसके अलावा जनपद पंचायत की नियमित बैठकें नहीं कराने, बिना प्राक्कलन वृक्षारोपण कार्य कराने तथा जनपद सदस्यों को जानकारी दिए बिना वाटर कूलर और कुर्सियों की खरीदी किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन मामलों में लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इन सभी प्रकरणों में संबंधित अभिलेखों की जांच से ही आरोपों की पुष्टि या स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई में देरी?
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रभारी CEO को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है। हालांकि, राजनीतिक संरक्षण के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह शिकायतों पर की गई कार्रवाई, जांच की वर्तमान स्थिति और लंबित मामलों के कारणों को स्पष्ट करे, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।
DDO पावर के मूल आदेश की जांच जरूरी
इस विवाद में सबसे अहम सवाल यह है कि प्रभारी CEO को वित्तीय अधिकार और DDO पावर किस आदेश के तहत दिए गए हैं तथा उस आदेश में किन शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया है। कर्मचारी की श्रेणी के आधार पर अधिकारों को स्वतः नियम-विरुद्ध माना जा सकता; इसके लिए लागू सेवा नियमों, वित्तीय प्रावधानों और मूल आदेश की जांच आवश्यक है। जनपद सदस्यों ने इसी प्रक्रिया की समीक्षा कर अधिकारों को वापस लेने और संबंधित कर्मचारी को प्रभार से हटाने की मांग की है।




